उपराष्ट्रपति ने खुले समुद्र में मत्स्य पालन के लिए प्राधिकरण पत्र जारी किया

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 09-07-2026
Vice President issues authorisation letter for high seas fishing
Vice President issues authorisation letter for high seas fishing

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
 उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने बृहस्पतिवार को खुले समुद्र में मत्स्य पालन के सतत दोहन के लिए प्राधिकरण पत्र (एलओए) और ओडिशा डीप सी फिशिंग मिशन दस्तावेज जारी किया।
 
एक दिवसीय दौरे पर सुबह भुवनेश्वर पहुंचे राधाकृष्णन ने ओडिशा के राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी तथा केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह, धर्मेंद्र प्रधान और एस. पी. सिंह बघेल की मौजूदगी में इन दोनों पहलों की शुरुआत की।
 
उपराष्ट्रपति ने आधिकारिक ‘एक्स’ खाते से किए गए पोस्ट में कहा, ‘‘उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन का आज भुवनेश्वर स्थित बीजू पटनायक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचने पर गर्मजोशी से स्वागत किया गया। हवाई अड्डे पर ओडिशा के राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपति, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और अन्य गणमान्य लोगों ने उनकी अगवानी की।’’
 
राज्यपाल कंभमपति ने भी ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, ‘‘ओडिशा आगमन पर उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन का स्वागत किया। ओडिशा के लोगों की ओर से मैं उनका हार्दिक स्वागत करता हूं और राज्य के सफल दौरे के लिए शुभकामनाएं देता हूं।’’
 
अधिकारियों ने बताया कि भारतीय ध्वज वाली मछुआरों की नौकाओं के लिए खुले समुद्र में मत्स्य पालन के सतत दोहन संबंधी दिशानिर्देशों के तहत प्राधिकरण पत्र (एलओए) एक अनिवार्य प्रावधान है।
 
मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि खुले समुद्र में मत्स्य पालन या उससे संबंधित गतिविधियां संचालित करने वाले भारतीय ध्वज वाली नौकाओं के लिए यह प्राधिकरण पत्र (एलओए) एक पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था प्रदान करता है। इससे मछुआरों और जहाज संचालकों के लिए नियमों के अनुपालन की प्रक्रिया सरल होगी।
 
अधिकारियों ने बताया कि ‘ओडिशा डीप सी फिशिंग मिशन’ (2026-2036) राज्य सरकार की प्रमुख पहल है जिसका उद्देश्य ओडिशा के अपतटीय व गहरे समुद्र में मत्स्य पालन की क्षमता का दोहन करना तथा राज्य को गहरे समुद्र में मत्स्य पालन और समुद्री उत्पादों के निर्यात के अग्रणी केंद्र के रूप में विकसित करना है।
 
 
प्रादेशिक भुवनेश्वर