नई दिल्ली
भारत और कनाडा के बीच व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने कनाडा के हाई कमिश्नर क्रिस्टोफर कूटर से मुलाकात की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच प्रस्तावित कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA), निवेश बढ़ाने और टिकाऊ विकास को लेकर चर्चा हुई।
कनाडा इन इंडिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि बैठक में CEPA के जरिए नए आर्थिक अवसरों को खोलने, व्यापार और निवेश संबंधों को गहरा करने पर बातचीत हुई।
यह बैठक भारत-कनाडा CEPA समझौते की तीसरे दौर की बातचीत के बाद हुई है। दोनों देशों के अधिकारियों के बीच यह वार्ता 6 से 10 जुलाई 2026 तक कनाडा के ओटावा में आयोजित की गई थी।
वाणिज्य विभाग के अनुसार, इस दौर की बातचीत में कई अहम क्षेत्रों में सकारात्मक प्रगति हुई है। दोनों देशों ने साल 2026 के भीतर समझौते को पूरा करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
CEPA सिर्फ सामानों के व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें कई बड़े क्षेत्र शामिल होंगे:
इसके अलावा दोनों देशों ने बाजार पहुंच, व्यापार नियम, कृषि, फार्मा, स्वच्छ ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों पर भी चर्चा की।
कनाडा भारत के लिए पोटाश, दालों और ऊर्जा का बड़ा स्रोत है, जबकि भारत कनाडा को दवाइयां, कपड़ा, इंजीनियरिंग सामान और आईटी सेवाएं निर्यात करता है।
दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ाने के लिए CEPA को एक महत्वपूर्ण समझौते के तौर पर देखा जा रहा है। इससे कंपनियों के लिए नए अवसर खुल सकते हैं और निवेश को बढ़ावा मिल सकता है।
भारत और कनाडा वैश्विक सप्लाई चेन में बदलाव के बीच अपने व्यापारिक साझेदारों को मजबूत करना चाहते हैं। CEPA पूरा होने के बाद इसे लागू करने से पहले कानूनी जांच और दोनों देशों की मंजूरी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
दोनों देशों के बीच हाल के वर्षों में वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार करीब 10 अरब कनाडाई डॉलर रहा है। CEPA लागू होने के बाद व्यापार और निवेश के नए रास्ते खुलने की उम्मीद जताई जा रही है।