भोपाल:
मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने राज्य विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक, 2026 पेश कर दिया है। इस विधेयक को लेकर राज्य की राजनीति में बहस तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसे सभी नागरिकों को समान अधिकार देने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया है, जबकि कांग्रेस ने विधेयक पेश किए जाने की प्रक्रिया और इसके प्रावधानों पर आपत्ति जताई है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि देश और राज्य दोनों के लिए एक समान कानून समय की आवश्यकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि मध्य प्रदेश इस दिशा में एक नई मिसाल कायम करेगा।
मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि मानसून सत्र का यह दिन राज्य के इतिहास में महत्वपूर्ण साबित होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्य प्रदेश सरकार ऐसा कानून लाने जा रही है, जो विभिन्न धर्मों और समुदायों की परंपराओं का सम्मान करते हुए विवाह संबंधी व्यवस्था में समानता स्थापित करेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा, "एक समान कानून देश और राज्य दोनों के लिए आवश्यक है। हमारी सरकार ने इस सत्र में यूसीसी विधेयक पेश करने का निर्णय लिया है। यह कानून अलग-अलग धर्मों और जीवनशैली वाले लोगों के बीच विवाह संबंधी नियमों में समानता लाने का प्रयास करेगा।"
मोहन यादव ने प्रस्तावित कानून के एक महत्वपूर्ण प्रावधान की जानकारी देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति कानूनी रूप से तलाक लिए बिना दूसरी शादी करने का प्रयास करता है, तो उसे इसकी अनुमति नहीं मिलेगी। इतना ही नहीं, ऐसा करने पर उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और जेल की सजा तक हो सकती है।
सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य विवाह संस्था को अधिक पारदर्शी और कानूनसम्मत बनाना है, ताकि सभी नागरिकों के अधिकारों की समान रूप से रक्षा की जा सके।
विधानसभा में यह विधेयक सोमवार को राज्य के मंत्री गौतम टेटवाल ने पेश किया। इससे एक दिन पहले मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इसे मंजूरी दी गई थी।
विधेयक पेश करते हुए गौतम टेटवाल ने कहा कि राज्य में विभिन्न धर्मों और संप्रदायों के लोग अलग-अलग सामाजिक और वैवाहिक परंपराओं का पालन करते हैं। उनका कहना था कि विवाह से जुड़े मामलों में एक समान कानूनी व्यवस्था होने से सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान जिम्मेदारियां सुनिश्चित होंगी।
मध्य प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने इस विधेयक का स्वागत करते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता का विचार नया नहीं है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद से ही देश में इस कानून की आवश्यकता महसूस की जाती रही है।
खंडेलवाल ने कहा, "डॉ. भीमराव आंबेडकर भी मानते थे कि देश के सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून होना चाहिए। अब जब मध्य प्रदेश सरकार इस दिशा में कदम बढ़ा रही है, तो कांग्रेस को भी इसका समर्थन करना चाहिए। हर नागरिक को समान अधिकार मिलना लोकतंत्र की मूल भावना है।"
वहीं कांग्रेस ने इस विधेयक का विरोध किया है। पार्टी का कहना है कि विधेयक को विधानसभा की पूर्व निर्धारित कार्यसूची में शामिल नहीं किया गया था और इसे कार्यवाही के दौरान अचानक पेश किया गया। कांग्रेस ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतने महत्वपूर्ण विधेयक पर पर्याप्त चर्चा और सभी पक्षों से व्यापक परामर्श होना चाहिए था।
हालांकि सरकार का कहना है कि विधेयक पूरी संवैधानिक प्रक्रिया के तहत पेश किया गया है और इस पर सदन में विस्तृत चर्चा होगी।
मध्य प्रदेश में यूसीसी विधेयक पेश किए जाने को राजनीतिक और कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उत्तराखंड के बाद मध्य प्रदेश उन राज्यों में शामिल हो गया है, जिन्होंने समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में ठोस कदम बढ़ाया है।
अब विधानसभा में इस विधेयक पर चर्चा और मतदान के बाद इसकी आगे की प्रक्रिया तय होगी। इस बीच यूसीसी को लेकर राज्य में राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।