Uproar in Kerala Assembly over PM Shri, government says no decision has been taken
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
केरल विधानसभा में बुधवार को केंद्र की प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया (पीएम-श्री) योजना को लेकर तीखी बहस हुई। सामान्य शिक्षा मंत्री एन. शमसुद्दीन ने कहा कि संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार ने योजना को लागू करने के संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया है, जबकि विपक्षी वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) ने आरोप लगाया कि राज्य में इसे लागू कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
यह स्थिति भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) विधायक पी. प्रसाद के कार्य स्थगन प्रस्ताव नोटिस पर चर्चा के दौरान बनी। विधानसभा अध्यक्ष तिरुवंचूर राधाकृष्णन ने प्रस्ताव की अनुमति देने से इनकार कर दिया, जिसके विरोध में विपक्ष ने सदन से बहिर्गमन किया।
विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के नेता शमसुद्दीन ने कहा कि सरकार ने न तो केंद्र के साथ किसी समझौते पर हस्ताक्षर किया है और न ही योजना के क्रियान्वयन के बारे में कोई निर्णय लिया है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमने किसी एमओयू (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर नहीं किया है और कोई निर्णय नहीं लिया गया है। मंत्रिमंडल की एक उपसमिति इस मुद्दे की समीक्षा कर रही है और सरकार केवल ऐसा निर्णय लेगी जो संघ परिवार के किसी भी एजेंडे के समक्ष समर्पण किए बिना केरल के हितों की रक्षा करे।’’
मंत्री ने आरोप लगाया कि वह पूर्ववर्ती एलडीएफ सरकार थी जिसने राज्य के हितों से समझौता करते हुए केंद्र के साथ करार किया था। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे खिलाफ लगाए जा रहे आरोप उनकी दोहरी नीति को छिपाने के लिए हैं।’’
शमसुद्दीन ने सवाल किया, ‘‘यदि समझौते को कानूनी रूप से वापस लिया जा सकता था तो पिछली सरकार अदालत क्यों नहीं गई? आपने मुकदमा क्यों नहीं दायर किया?’’
मंत्री ने यह भी दावा किया कि पूर्ववर्ती वाम सरकार के कार्यकाल में ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) को केरल के उच्च शिक्षा क्षेत्र में लागू किया जा चुका था।
हालांकि, विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने मंत्री के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि पीएम-श्री योजना के संबंध में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने के अलावा कुछ नहीं हुआ था और उनकी सरकार ने बाद में उसे स्थगित कर दिया था।