आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने शुक्रवार को कहा कि प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) सभी नागरिकों के लिए कानून को समान रूप से लागू करना सुनिश्चित करेगी, जिसमें महिलाओं और बच्चों के अधिकारों पर विशेष जोर दिया जाएगा।
शर्मा ने कहा कि आदिवासी समुदायों की परंपराओं और रीति-रिवाजों की रक्षा के लिए उन्हें यूसीसी के दायरे से बाहर रखा जाएगा।
मुख्यमंत्री ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘असम में समान नागरिक संहिता सभी के लिए कानून के शासन का समान रूप से लागू होना सुनिश्चित करेगी और सभी को, विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों को, उचित अधिकारों की गारंटी देगी।’’
उन्होंने कहा, ‘‘अपने रीति-रिवाजों और परंपराओं की रक्षा के लिए असम के जनजातीय समाज को यूसीसी के दायरे से बाहर रखा जाएगा।’’
बुधवार को नयी सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में राज्य में यूसीसी को लागू करने को मंजूरी दी गई थी।
प्रस्तावित यूसीसी के उद्देश्यों के संबंध में सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह ‘एक राज्य, एक कानून’ के बारे में है, जो विवाह, तलाक और उत्तराधिकार के लिए एक ही कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करेगा।
प्रस्तावित यूसीसी के मुताबिक, विवाह की कानूनी आयु महिलाओं के लिए 18 वर्ष और पुरुषों के लिए 21 वर्ष होगी, तथा सभी विवाहों और सहजीवन संबंधों की जानकारी 60 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से देनी होगी।
इस बात का उल्लेख करते हुए कि यूसीसी प्रत्येक नागरिक के लिए न्याय सुनिश्चित करेगा, शर्मा ने कहा कि इसके तहत पति-पत्नी, बच्चे और माता-पिता को समान उत्तराधिकार मिलेगा।