आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार शिक्षा और रोजगार के बीच की खाई पाटने के लिए काम कर रही है और इस बात पर बल दिया कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो युवाओं को कौशल, अवसर और सम्मानजनक आजीविका से जोड़ सके।
उच्च शिक्षा विभाग के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय ‘कैंपस टु करियर समिट’ का उद्घाटन के बाद अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालयों, उद्योगों और सरकार के बीच मजबूत तालमेल की जरूरत पर बल दिया, ताकि शिक्षा को अर्थव्यवस्था की जरूरतों से जोड़ा जा सके।
उन्होंने कहा, ‘‘कर्नाटक की विकास गाथा को आगे बढ़ाने के लिए विश्वविद्यालयों, उद्योगों और सरकार, इन तीनों स्तंभों को मिलकर काम करना होगा, तभी शिक्षा अर्थव्यवस्था की असली जरूरतों को प्रतिबिंबित कर पाएगी।’’
सिद्धरमैया ने याद दिलाया कि डॉ. भीमराव आंबेडकर शिक्षा को सामाजिक बदलाव और सशक्तीकरण का सबसे बड़ा हथियार मानते थे, उनके लिए यह एक मौलिक अधिकार था।
उन्होंने कहा कि कर्नाटक सरकार भी शिक्षा को एक न्यायसंगत और प्रगतिशील समाज की नींव मानती है, जो ज्ञान, कौशल, नवाचार और समावेशी विकास को संभव बनाती है।
उन्होंने कहा, ‘‘कर्नाटक का देश की सबसे गतिशील अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनना कोई संयोग नहीं है। यह दशकों की शिक्षा, संस्था-निर्माण और मानव संसाधन में निवेश का परिणाम है।’’
सम्मेलन में उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, उच्च शिक्षा मंत्री एम.सी. सुधाकर, वृहद एवं मध्यम उद्योग मंत्री एम.बी. पाटिल और सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री प्रियंक खरगे भी मौजूद थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार भविष्य के लिए तैयार विश्वविद्यालय और कॉलेज बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, जहां रोजगार क्षमता, कौशल विकास और करियर की तैयारी पर खुली चर्चा हो।