आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
हरियाणा राज्य मानवाधिकार आयोग (एचएचआरसी) ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ‘प्रिसन स्टैटिस्टिक्स इंडिया-2024’ रिपोर्ट में राज्य के कारागारों में आत्महत्या, अप्राकृतिक मौत, हिंसा, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के बढ़ते मामले और क्षमता से अधिक कैदियों को रखने संबंधी जानकारी पर स्वत: संज्ञान लिया है।
आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा, न्यायिक सदस्य कुलदीप जैन और सदस्य दीप भाटिया की पीठ ने 13 मई को पारित एक विस्तृत आदेश में राज्य के अधिकारियों से स्पष्टीकरण और रिपोर्ट तलब की। आयोग ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों को गरिमा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और मानसिक देखभाल की दी गई गारंटी से कैदियों को केवल इसलिए वंचित नहीं किया जा सकता क्योंकि वे सलाखों के पीछे हैं।
आयोग ने एनसीआरबी की रिपोर्ट के हवाले से प्रकाशित एक खबर पर संज्ञान लिया जिसके मुताबिक हरियाणा में 2024 के दौरान 15 कैदियों ने आत्महत्या की।
खबर के मुताबिक हरियाणा एकमात्र ऐसा राज्य था जहां जेल परिसर के भीतर आग्नेयास्त्रों से जुड़ी हिंसक झड़पें हुईं।
इसके अलावा कारागारों में मानसिक तनाव, अवसाद, नशा छोड़ने से उत्पन्न समस्याएं, हिंसा, क्षमता से अधिक कैदी और पर्याप्त परामर्श सुविधाओं की कमी को लेकर भी गंभीर चिंताएं जताई गईं।
अपने आदेश में एचएचआरसी ने कहा कि कारागार प्रशासन कैदियों को आत्म-हानि, मानसिक आघात, हिंसा, अवसाद और सामाजिक अलगाव से बचाने के लिए संवैधानिक रूप से बाध्य हैं।