UCC ध्रुवीकरण का 'तड़ित चालक' हो सकता है: Jamaat-e-Islami Hind

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 16-07-2023
  जमात-ए-इस्लामी हिंद
जमात-ए-इस्लामी हिंद

 

नई दिल्ली. जमात-ए-इस्लामी हिंद ने रविवार को भारत के 22वें विधि आयोग को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर अपना विचार प्रस्तुत किया, जिसमें कहा गया कि इसमें ‘धु्रवीकरण का तड़ित चालक’ बनने की क्षमता है. संगठन द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि परामर्श का समय और प्रकृति पूरी प्रक्रिया के पीछे की मंशा पर संदेह पैदा करती है. यह बयान विधि आयोग द्वारा 14 जुलाई को यूसीसी पर जनता की राय मांगने के जवाब में जारी किया गया था.

यूसीसी की परिभाषा को अस्पष्ट बताते हुए जमात-ए-इस्लामी हिंद ने कहा कि एक व्यापक राय पेश करना लगभग असंभव काम है. एकरूपता का विचार भारत की विविध और बहुलवादी सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के साथ-साथ श्अनेकता में एकताश् के संवैधानिक लोकाचार का खंडन करता है. इसलिए, अनुच्छेद 44 में निहित निर्देशक सिद्धांत को लागू करने का कोई भी तरीका संविधान के दायरे से बाहर होगा, अगर यह अनुच्छेद 25 या अनुच्छेद 29 के तहत नागरिक के अधिकारों के साथ टकराव होता है.

मुस्लिम पर्सनल लॉ के संबंध में, जमात को एक स्पष्टीकरण की आवश्यकता थी कि विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और संबंधित मामलों में इस्लामी कानून का पालन मुसलमानों द्वारा एक धार्मिक दायित्व माना जाता है, और इसे ‘अभ्यास’ का एक अनिवार्य पहलू माना जाता है. उनका धर्म, जो संविधान के अनुच्छेद 25 द्वारा संरक्षित है.

 


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