भारत के पेमेंट सिस्टम को क्वांटम-प्रूफ बनाने का समय आ गया है: RBI के डिप्टी गवर्नर मुर्मू

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 11-09-2026
Time has come to quantum-proof India's payment systems, says RBI Dy Governor Murmu
Time has come to quantum-proof India's payment systems, says RBI Dy Governor Murmu

 

मुंबई (महाराष्ट्र

रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) के डिप्टी गवर्नर शिरीष चंद्र मुर्मू ने शुक्रवार को कहा कि भारतीय पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर्स और नेटवर्क ऑपरेटर्स के लिए पेमेंट सिस्टम को क्वांटम-प्रूफ बनाने की दिशा में आगे बढ़ने का समय आ गया है।
 
उन्होंने क्वांटम कंप्यूटिंग से मौजूदा फाइनेंशियल सिक्योरिटी सिस्टम को होने वाले खतरों के खिलाफ जल्द तैयारी करने का आह्वान किया।
 
मुंबई में ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में मुख्य भाषण देते हुए मुर्मू ने कहा, "इसलिए, भारतीय पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर्स और नेटवर्क ऑपरेटर्स के लिए हमारे पेमेंट सिस्टम को क्वांटम-प्रूफ बनाने की दिशा में आगे बढ़ने का समय आ गया है।"
 
उन्होंने कहा कि बैंकों, पेमेंट ऑपरेटर्स, फिनटेक कंपनियों, टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर्स और स्टैंडर्ड-सेटर्स को मिलकर काम करना होगा क्योंकि क्वांटम से जुड़े खतरों का समाधान अकेले संस्थान नहीं कर सकते।
 
उन्होंने कहा, "बैंकों, पेमेंट ऑपरेटर्स, फिनटेक कंपनियों, टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर्स और स्टैंडर्ड-सेटर्स को मिलकर आगे बढ़ना होगा, क्योंकि क्वांटम रेज़िलिएंस (क्वांटम खतरों से निपटने की क्षमता) एक इकोसिस्टम की क्षमता है, न कि किसी एक संस्थान की।"
 
उन्होंने कहा, "क्वांटम कंप्यूटिंग ऑप्टिमाइज़ेशन और फाइनेंशियल मॉडलिंग में बड़ी कामयाबी का वादा करती है। 
 
यह उन क्रिप्टोग्राफिक आधारों को भी चुनौती दे सकती है जिन पर आज का फाइनेंशियल सिस्टम टिका है।"
 
हालांकि, डिप्टी गवर्नर ने यह भी कहा कि यह खतरा तुरंत नहीं आने वाला है। उन्होंने कहा कि पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर का टेक्नोलॉजी साइकिल लंबा होता है और नए सिक्योरिटी स्टैंडर्ड्स को अपनाने में कई साल लग सकते हैं।
 
उन्होंने "अभी इकट्ठा करो, बाद में डिक्रिप्ट करो" (harvest now, decrypt later) वाले जोखिम की ओर भी इशारा किया, जिसके तहत आज इकट्ठा की गई एन्क्रिप्टेड जानकारी भविष्य में कंप्यूटिंग क्षमताएं बढ़ने पर एक्सेस की जा सकती है।
 
भारत के लिए, जहां बड़े पैमाने पर डिजिटल पेमेंट होते हैं, मुर्मू ने कहा कि क्वांटम तैयारी को व्यापक साइबर-रेज़िलिएंस फ्रेमवर्क के हिस्से के तौर पर देखा जाना चाहिए।
 
मुर्मू ने कहा कि RBI ने देश के फाइनेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर को ऐसे खतरों के लिए तैयार करने के लिए 'क्वांटम सिक्योर और एडेप्टिव फाइनेंशियल इकोसिस्टम' पर एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई है।  
 
उन्होंने 'प्रोजेक्ट लीप' का भी ज़िक्र किया, जो BIS इनोवेशन हब और पार्टनर सेंट्रल बैंकों की एक पहल है। इस प्रोजेक्ट के तहत लिक्विडिटी ट्रांसफर के एक एक्सपेरिमेंट में पारंपरिक डिजिटल सिग्नेचर की जगह पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी का इस्तेमाल किया गया।
 
मुर्मू ने कहा, "इससे हमें टाइमिंग के बारे में सीख मिलती है: इस काम में संस्थानों की उम्मीद से ज़्यादा समय लगता है और इसे अकेले नहीं किया जा सकता।"
 
यह बात ऐसे समय में कही गई है जब भारत का डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम बड़े पैमाने पर काम कर रहा है। मुर्मू के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में UPI ने लगभग 24,162 करोड़ ट्रांज़ैक्शन प्रोसेस किए, जिनकी कुल वैल्यू लगभग 314 लाख करोड़ रुपये थी। यह भारत के डिजिटल पेमेंट ट्रांज़ैक्शन की कुल संख्या का लगभग 85 प्रतिशत है।
 
मुर्मू ने कहा, "हमें न सिर्फ़ भविष्य के लिए, बल्कि भविष्य में पैदा होने वाले जोखिमों के लिए भी इनोवेशन करना होगा।"