There is no place for personal enmity in politics: G. Sudhakaran
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
केरल में विधानसभा के अस्थायी अध्यक्ष (प्रोटेम स्पीकर) के रूप में बुधवार को शपथ लेने वाले जी. सुधाकरन ने कहा कि उनकी माकपा में उनके पूर्व सहयोगी तथा पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है, क्योंकि राजनीति में व्यक्तिगत विद्वेष के लिए कोई स्थान नहीं होता।
माकपा के पूर्व नेता सुधाकरन ने संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अंबालापुझा विधानसभा सीट से जीत दर्ज की है। उन्होंने कहा कि वह विजयन और अन्य विधायकों में कोई अंतर नहीं देखते जिन्हें वह बृहस्पतिवार को शपथ दिलाएंगे।
सुधाकरन ने कहा कि विधानसभा सचिव द्वारा पूर्व निर्धारित क्रम में विधायकों को बुलाया जाएगा और अस्थायी अध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका केवल शपथ ग्रहण प्रक्रिया शुरू करने तक सीमित होगी, जबकि शपथ का शेष भाग विधायक स्वयं पढ़ेंगे।
उन्होंने यहां एक टीवी चैनल से कहा, “विजयन भी हम सभी की तरह केवल एक विधायक हैं। वह दो बार मुख्यमंत्री रहे। मैं भी उनके एक कार्यकाल में मंत्री रह चुका हूं। मेरी उनसे कोई दुश्मनी नहीं है। राजनीति में व्यक्तिगत दुश्मनी के लिए कोई जगह नहीं होती। जिसके मन में ऐसी भावना होती है, वह इससे नुकसान उठाता है।’’
माकपा से अलग होने के संबंध में उन्होंने कहा कि सदस्यता नवीनीकृत नहीं कराने का निर्णय लेने से पहले वह 63 वर्षों तक पार्टी के सदस्य रहे। उन्होंने कहा, “इस तरह से देखें तो मैंने न तो इस्तीफा दिया और न ही मुझे माकपा से निकाला गया।”
विधानसभा चुनाव में माकपा की हार पर सुधाकरन ने कहा कि इसके लिए विजयन और माकपा के राज्य सचिव एम. वी. गोविंदन भी जिम्मेदार हैं, लेकिन वह इस बारे में कुछ नहीं कह सकते कि उन्हें माकपा में अपने-अपने पदों से इस्तीफा देना चाहिए या नहीं।