वैवाहिक दुष्कर्म संबंधी याचिकाओं पर केंद्र के रुख के बाद सुनवाई की तारीख तय करेगा उच्चतम न्यायालय

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 07-09-2026
The Supreme Court will fix the date of hearing on the petitions related to marital rape after the Centre's stand.
The Supreme Court will fix the date of hearing on the petitions related to marital rape after the Centre's stand.

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि वैवाहिक दुष्कर्म को अपराध की श्रेणी में लाने से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई की उपयुक्त तारीख तय करने से पहले वह केंद्र सरकार का रुख जानना चाहेगा।
 
वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष वैवाहिक दुष्कर्म के मामले में पति के खिलाफ अभियोजन से संबंधित एक याचिका का उल्लेख किया और अनुरोध किया कि याचिकाओं के इस समूह को नवंबर में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।
 
पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल रहीं।
 
पीड़ित पत्नी की ओर से पेश जयसिंह ने कहा कि इन मामलों को बुधवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है, लेकिन केंद्र ने अभी तक इस मामले में कोई ठोस जवाब दाखिल नहीं किया है और पक्षकारों ने भी एक-दूसरे को याचिकाओं की प्रतियां नहीं दी हैं।
 
वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा, ‘‘केंद्र ने अभी तक जवाब दाखिल नहीं किया है, केवल प्रारंभिक आपत्ति दर्ज की है। मैं नवंबर में सुनवाई की निश्चित तारीख चाहती हूं। हमने अभी तक याचिकाओं की प्रति का आदान-प्रदान नहीं किया है। हमें नहीं पता कि इन याचिकाओं में क्या समानताएं हैं और क्या अंतर हैं।’’
 
वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष वैवाहिक दुष्कर्म के मामले में पति के खिलाफ अभियोजन से संबंधित एक याचिका का उल्लेख किया और अनुरोध किया कि याचिकाओं के इस समूह को नवंबर में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।
 
पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल रहीं।
 
पीड़ित पत्नी की ओर से पेश जयसिंह ने कहा कि इन मामलों को बुधवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है, लेकिन केंद्र ने अभी तक इस मामले में कोई ठोस जवाब दाखिल नहीं किया है और पक्षकारों ने भी एक-दूसरे को याचिकाओं की प्रतियां नहीं दी हैं।
 
वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा, ‘‘केंद्र ने अभी तक जवाब दाखिल नहीं किया है, केवल प्रारंभिक आपत्ति दर्ज की है। मैं नवंबर में सुनवाई की निश्चित तारीख चाहती हूं। हमने अभी तक याचिकाओं की प्रति का आदान-प्रदान नहीं किया है। हमें नहीं पता कि इन याचिकाओं में क्या समानताएं हैं और क्या अंतर हैं।’’