यूपी विधायक अब्बास अंसारी को उच्चतम न्यायालय ने अंतरिम जमानत

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 13-01-2026
The Supreme Court has granted interim bail to UP MLA Abbas Ansari.
The Supreme Court has granted interim bail to UP MLA Abbas Ansari.

 

नई दिल्ली

उत्तर प्रदेश के विधायक अब्बास अंसारी को गिरोहबंद अधिनियम के तहत चल रहे एक मामले में उच्चतम न्यायालय ने अपनी पूर्व अंतरिम जमानत की पुष्टि कर दी है। अंसारी दिवंगत गैंगस्टर मुख्तार अंसारी के पुत्र हैं और उनके खिलाफ चित्रकूट जिले के कोतवाली कर्वी थाने में 31 अगस्त 2024 को उत्तर प्रदेश गिरोहबंद और समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1986 के तहत जबरन वसूली और मारपीट के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

इससे पहले, सात मार्च 2025 को उच्चतम न्यायालय ने अंसारी को इस मामले में छह सप्ताह की अंतरिम जमानत दी थी। मंगलवार को प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जे. बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने अंसारी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अधिवक्ता निजाम पाशा की दलीलों पर गौर करते हुए पहले दिए गए अंतरिम जमानत आदेश को नियमित कर दिया।

मार्च 2025 में मिली यह राहत अंसारी की कासगंज जेल से रिहाई का रास्ता साफ कर चुकी है। उनके खिलाफ अन्य सभी आपराधिक मामलों में उन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी है। इस दौरान पीठ ने कुछ शर्तें लागू की थीं, जिनमें से कुछ में ढील भी दी गई है। इनमें प्रमुख शर्त यह थी कि अंसारी जांच अधिकारी की अनुमति के बिना लखनऊ नहीं छोड़ सकते।

अंसारी को 4 नवंबर 2022 को अन्य आपराधिक मामलों में हिरासत में लिया गया था, जबकि 6 सितंबर 2024 को उन्हें गिरोहबंद अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया था। न्यायालय ने पिछले साल मार्च में राहत देते हुए स्पष्ट किया था कि गिरोहबंद अधिनियम के मामले को छोड़कर अन्य सभी आपराधिक मामलों में उन्हें जमानत दी गई है।

इस मामले में अन्य आरोपी नवनीत सचान, नियाज अंसारी, फराज खान और शाहबाज आलम खान शामिल हैं। पहले इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 18 दिसंबर 2024 को अंसारी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया था।

अंसारी की यह अंतरिम जमानत उच्चतम न्यायालय की पुष्टि के बाद अब कानूनी रूप से और मजबूत हो गई है, और इससे उनके खिलाफ लंबित अन्य आपराधिक मामलों में उनके जेल में रहने की स्थिति में कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। न्यायालय ने मामले की सुनवाई के दौरान सुनिश्चित किया कि अंसारी अपने अधिकारों और न्यायिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए आगे की जांच में सहयोग करें।