आवाज़ द वॉयस | नई दिल्ली
तेज़ रफ़्तार और आपाधापी से भरी आधुनिक ज़िंदगी में इंसान अक्सर अपने कर्तव्यों, व्यवहार और मूल्यों के बीच संतुलन खो बैठता है। रोज़मर्रा की दौड़ में हम या तो अत्यधिक कठोर हो जाते हैं या फिर इतने उदार कि अपनी आस्था और उसके मूल संदेशों से दूर निकल जाते हैं। यही स्थिति दीन और दुनिया के रिश्ते को लेकर भी देखने को मिलती है। किसी एक पक्ष पर पूरी तरह झुक जाना न तो व्यावहारिक है और न ही इस्लाम की मूल शिक्षाओं के अनुरूप। इस्लाम संतुलन, विवेक और मध्य मार्ग का संदेश देता है, लेकिन बदलते समय में इस संतुलन को बनाए रखना कई बार कठिन हो जाता है।
इसी अहम ज़रूरत को महसूस करते हुए आवाज़ द वॉयस ने एक नए और विचारोत्तेजक पॉडकास्ट कार्यक्रम की शुरुआत की है-“दीन और दुनिया”। यह पॉडकास्ट उन सवालों, उलझनों और भ्रांतियों से संवाद करता है, जिनसे आज का मुस्लिम समाज जूझ रहा है। इसका उद्देश्य यह समझाना है कि दीन और दुनिया एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, बल्कि सही समझ और संतुलन के साथ दोनों साथ-साथ चल सकते हैं।

इस पॉडकास्ट के पहले एपिसोड में दर्शकों और श्रोताओं को यह बताया गया है कि “दीन और दुनिया” को शुरू करने की प्रेरणा क्या रही और इसे लाने से पहले किस तरह का गहन चिंतन और तैयारी की गई। कई दिनों तक चले मंथन के बाद यह कार्यक्रम आकार ले सका। पहले एपिसोड के ज़रिये यह स्पष्ट करने की कोशिश की गई है कि आज के दौर में ऐसे विमर्श की कितनी आवश्यकता है, जो न तो कट्टरता की ओर धकेले और न ही आस्था से विमुख करे।
पॉडकास्ट के परिचय में बताया गया है कि “दीन और दुनिया” आवाज़ द वॉयस का एक नया और विशेष पॉडकास्ट है, जिसमें इस्लाम और आधुनिक जीवन के बीच संतुलन पर गंभीर और सार्थक चर्चा की जाती है।
इसके पहले अंक में मशहूर इतिहासकार और विचारक साक़िब सलीम, आवाज़ द वॉयस के एडिटर-इन-चीफ आतिर ख़ान के साथ मिलकर इस कार्यक्रम के मूल विचार और उद्देश्य पर बातचीत कर रहे हैं। यह संवाद न केवल कार्यक्रम की पृष्ठभूमि को स्पष्ट करता है, बल्कि श्रोताओं को यह भी बताता है कि आने वाले एपिसोड्स में किस तरह के विषयों पर चर्चा होगी।
यह पॉडकास्ट विशेष रूप से भारतीय मुसलमानों में इस्लाम को लेकर फैली कई गलत धारणाओं और एकांगी सोच को दूर करने का प्रयास करता है। इसका मकसद यह है कि मुस्लिम समाज आधुनिक समय की चुनौतियों को समझते हुए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़े और अपनी आस्था को जीवन से जोड़कर देखे, न कि उससे अलग करके।
“दीन और दुनिया” इस बात पर ज़ोर देता है कि शिक्षा, आधुनिकता, विज्ञान, महिला अधिकार और सामाजिक प्रगति इस्लाम के विरोधी नहीं हैं, बल्कि उसके मूल संदेश,न्याय, करुणा और संतुलनके ही विस्तार हैं।
हर सप्ताह इस पॉडकास्ट में इस्लामिक विद्वान, शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता और मुस्लिम बुद्धिजीवी शामिल होंगे, जो मेज़बान साक़िब सलीम के साथ समकालीन मुद्दों पर खुलकर चर्चा करेंगे।
इनमें आधुनिक शिक्षा, महिलाओं की भूमिका और अधिकार, रूढ़िवादी सोच, सामाजिक बदलाव, धार्मिक समझ और पहचान जैसे विषय प्रमुख होंगे। यह संवाद किसी उपदेशात्मक शैली में नहीं, बल्कि सहज, तार्किक और व्यावहारिक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि युवा वर्ग और आम श्रोता इससे आसानी से जुड़ सकें।
ऐसे समय में जब नकारात्मकता और टकराव को समाचारों की यूएसपी बना दिया गया है, आवाज़ द वॉयस एक अलग राह पर चल रहा है। यह देश का एकमात्र ऐसा डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो भारत और दुनिया भर से सहयोग, सह-अस्तित्व और शांतिपूर्ण जीवन से जुड़ी सकारात्मक कहानियाँ और विचार सामने लाता है।
इसका विश्वास है कि आस्था, जाति, क्षेत्र और भाषा की सीमाओं से परे हमारी कई चिंताएँ, चुनौतियाँ और भविष्य को लेकर दृष्टिकोण साझा हैं, और यही साझा आधार समाज को जोड़ने की सबसे बड़ी ताक़त बन सकता है।
आवाज़ द वॉयस का कंटेंट न केवल सकारात्मक पत्रकारिता को बढ़ावा देता है, बल्कि भारत और विदेशों में मुस्लिम समुदाय के बीच प्रगतिशील और संतुलित विचारों को भी प्रोत्साहित करता है। “दीन और दुनिया” इसी सोच का विस्तार है-एक ऐसा मंच, जो धार्मिक चेतना और आधुनिक जीवन के बीच पुल बनता है।
यह पॉडकास्ट उन लोगों के लिए है जो सवाल पूछना चाहते हैं, समझना चाहते हैं और एक बेहतर, संतुलित और जागरूक समाज की ओर कदम बढ़ाना चाहते हैं। “दीन और दुनिया” केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक संवाद है,जो हमें याद दिलाता है कि सच्ची आस्था वही है, जो इंसान को इंसान से जोड़ती है और दीन को दुनिया के साथ सामंजस्य में रखती है।