आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कहा कि देश को भले ही 77-78 वर्ष पहले आजादी मिल गई थी, लेकिन बस्तर में ‘‘आजादी का सूर्योदय 31 मार्च 2026 के बाद हुआ है।’’
शाह, 31 मार्च 2026 को छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद की समाप्ति की घोषणा के बाद सोमवार को पहली बार बस्तर पहुंचे जहां उन्होंने जिले के नेतानार गांव में पहले जन सुविधा केंद्र का उद्घाटन किया।
शाह ने कहा, “देश को आजादी भले ही 77-78 साल पहले मिल गई थी, लेकिन हमारे बस्तर में 31 मार्च 2026 के बाद आजादी का सूर्योदय हुआ है। मैं विश्वास दिला कर जाता हूं, जो देरी हुई उसके नुकसान की पूरी भरपाई की जाएगी। क्षेत्र के विकास के लिए भारत सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार कोई कसर नहीं छोड़ेगी।”
उन्होंने लोगों से विकास कार्यों में सहयोग करने की अपील करते हुए कहा, “अलग-अलग तरह की बातें करने वाले लोग आएंगे, लेकिन विकास को रोकना कभी विकास को नहीं लाता है। विकास को गति मिलेगी तभी उसका लाभ लोगों तक पहुंचेगा।”
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है और जब पूरे बस्तर में ऐसे 70 जन सुविधा केंद्र बन जाएंगे, तब वह ‘‘नए सूर्योदय’’ का दिन होगा।
राज्य से नक्सलवाद समाप्त होने की घोषणा के बाद सरकार ने बस्तर क्षेत्र में स्थापित सुरक्षा शिविरों को जन सुविधा केंद्रों में बदलने का फैसला किया है। इन केंद्रों में लोगों को एक ही परिसर में विभिन्न सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
शाह ने केंद्र की शुरूआत करते हुए कहा, ''आज आप सबके लिए और विशेष कर कर मेरे लिए बहुत ऐतिहासिक दिन है। शायद आप लोगों को अभी इसका महत्व समझ में नहीं आएगा, परंतु मैं आपको भरोसा दिला कर जाता हूं कि यह केंद्र आने वाले समय में आदिवासी भाई—बहन और बच्चों से हरा भरा हंसता खेलता दिखाई पड़ेगा, हम इसे ऐसे परिवर्तित करेंगे।''
उन्होंने कहा, ''आज मैं जिस भूमि पर खड़ा हूं वह भूमि अपने आप में भारत के हर नागरिक के लिए तीर्थ के समान भूमि है। शहीद वीर गुंडाधुर की यह जन्मभूमि है, कर्मभूमि है। 1910 में यह हमारे वीर आदिवासी नेता ने भूमकाल विद्रोह के नाम से स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत की थी। उन्हीं से प्रेरणा लेकर 2013 से सुरक्षा शिविर के रूप में रहा यह केंद्र अब सेवा केंद्र बनकर आदिवासियों की सेवा करेगा। मुझे हर्ष है की छत्तीसगढ़ शासन ने भी इसका नाम शहीद वीर गुंडाधुर के नाम से रखा है।''
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि एक जमाने में यहां एक साथ छह पुलिस कर्मियों की हत्या कर दी गई थी। यहां के स्कूल उजाड़े गए थे। यहां अस्पताल उजाड़े गए, यहां राशन नहीं पहुंचने दिया, यहां रोजगार और शिक्षा नहीं पहुंचने दिया, बैंक की कल्पना भी नहीं कर सकते थे, आज उस जगह पर गरीब आदिवासियों की सेवा करने का तीर्थ स्थल बनने का काम शुरू हो रहा है।