The success of a public servant is determined by the satisfaction of citizens: Chief Minister Adityanath
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को कहा कि लोक सेवक की सफलता केवल फाइलों के निस्तारण से नहीं, बल्कि इस बात से तय होती है कि उसके पास आया आम नागरिक संतुष्ट होकर लौटा या नहीं।
आदित्यनाथ ने कहा कि किसी बुजुर्ग को पेंशन के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और आम नागरिक की समस्याओं का समयबद्ध समाधान हो, यही लोक सेवा का वास्तविक उद्देश्य है।
आदित्यनाथ ने लखनऊ के लोक भवन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप ‘मिशन कर्मयोगी’ के तहत आयोजित दो दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला ‘साधना श्रृंखला-2026’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए लोकप्रिय टीवी धारावाहिक ‘ऑफिस-ऑफिस’ का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था ऐसी नहीं होनी चाहिए, जिसमें आम आदमी अपने छोटे-छोटे कामों के लिए एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक भटकता रहे। इसके लिए प्रशासन को सक्षम, संवेदनशील और नागरिक केंद्रित बनाना जरूरी है।
मुख्यमंत्री और केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जितेंद्र सिंह ने दीप प्रज्वलित कर कार्यशाला का उद्घाटन किया।
इस दौरान दोनों ने संयुक्त रूप से ‘उन्नति कैपेबिलिटी इंडेक्स’ और ‘नेशनल करिकुलम डिजाइन फ्रेमवर्क’ की शुरुआत की।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री ने क्षमता विकास को प्रशासनिक कामकाज की संस्कृति में बदलाव लाने का राष्ट्रीय अभियान बताते हुए तीन प्रमुख पहलों पर जोर दिया।
इनमें डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी को कृत्रिम मेधा (एआई) उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करना, पंचायतों और नगर निकायों के कार्मिकों की क्षमता बढ़ाना तथा अधिकारियों-कर्मचारियों की दक्षता को उनकी जिम्मेदारियों और पदोन्नति से जोड़ना शामिल है।