ग्रेट निकोबार परियोजना का मकसद एक कारोबारी का होटल और कैसीनो खुलवाना: राहुल

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 05-06-2026
project is to enable a businessman to open a hotel and casino: Rahul
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आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को दावा किया कि मोदी सरकार की यह दलील झूठी है कि ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना रक्षा और एक मालवाहक बंदरगाह से जुड़ी है।
 
उन्होंने आरोप लगाया कि यह वास्तव में एक व्यवसायी को भारत के सबसे महत्वपूर्ण पारिस्थितिकीय क्षेत्र में होटल और कैसीनो बनाने में मदद करने का प्रयास है।
 
राहुल गांधी ने इसी साल अप्रैल के अंत में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का दौरा किया था। उन्होंने बृहस्पतिवार को अपनी उस यात्रा पर आधारित 16 मिनट से अधिक का एक वीडियो जारी किया।
 
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने यह वीडियो ‘एक्स’ पर साझा करते हुए कहा, "मैंने भारत के सबसे दक्षिणी सिरे का दौरा किया। मैं इंदिरा प्वाइंट पर गया था। मैं सदियों से खड़े पेड़ों के नीचे गया। मैंने पृथ्वी पर सबसे जीवंत मूंगा चट्टानों वाले क्षेत्र में गोता लगाया। मैंने वहां रहने वाले लोगों के साथ मुलाकात की। ये वो आदिवासी समुदाय हैं जिनकी भूमि वन अधिकार अधिनियम का उल्लंघन करके छीन ली जा रही है।"
 
उनका कहना है कि भारत सरकार द्वारा इन द्वीपों पर बसे लोगों को उचित मुआवजा नहीं दिया जा रहा है
 
कांग्रेस नेता ने कहा, "मोदी सरकार और भाजपा आपको बताती है कि ग्रेट निकोबार परियोजना रक्षा क्षेत्र से जुड़ा है, जबकि ऐसा नहीं है।"
 
उन्होंने कहा, ‘‘यदि आईएनएस बाज का विस्तार किया जाएगा तो हम सरकार का पूरा समर्थन करेंगे।"
 
राहुल गांधी ने दावा किया कि नौसेना पांच साल से विस्तार की मांग कर रही है, लेकिन इस मांग को नजरअंदाज कर दिया गया है।
 
उन्होंने कहा कि सरकार लोगों को यह भी बता रही है कि यह परियोजना मालवाहक बंदरगाह से जुड़ी है जबकि ऐसा नहीं है।
 
राहुल गांधी ने आरोप लगाया, "वास्तव में यह क्या है, डेढ़ करोड़ पेड़ काट दिए गए। आधिकारिक मानचित्रों से मूंगा चट्टानें मिटा दी गईं। सैनिक और आदिवासी विस्थापित कर दिए गए, ताकि एक व्यवसायी भारत की सबसे महत्वपूर्ण पारिस्थितिकीय भूमि पर होटल और कैसीनो बना सके।"
 
उन्होंने कहा, "मैंने जिस भी युवा भारतीय से बात की है वह इसे समझता है। आप जानते हैं कि कोई भी लाभ उस चीज को नष्ट करने के लायक नहीं है जिसे कभी वापस नहीं पाया जा सकता।"
 
गांधी ने कहा कि वह पारिस्थितिकीय रूप से संतुलित विकास के पक्ष में हैं।
 
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ये द्वीप दुनिया में अब तक देखे गए सबसे असाधारण टिकाऊ गंतव्य हो सकते हैं।