‘प्रदूषक कीमत चुकाएं’ का सिद्धांत ‘प्रदूषण करो और भुगतान करो’ तक सीमित न हो: न्यायालय में दलील

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 25-03-2026
The principle of 'polluter pays' should not be limited to 'pollute and pay': plea in court
The principle of 'polluter pays' should not be limited to 'pollute and pay': plea in court

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
उच्चतम न्यायालय में बुधवार को एक मामले में सुनवाई के दौरान दलील दी गई कि ‘पहले से’ पर्यावरण मंजूरी देना महज एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक ठोस सुरक्षा उपाय है और ‘प्रदूषक कीमत चुकाएं’ के सिद्धांत को ‘प्रदूषण करो और फिर भुगतान करो’ में नहीं बदला जाना चाहिए।
 
प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ के समक्ष यह दलील वरिष्ठ अधिवक्ता सृष्टि अग्निहोत्री ने दी।
 
अग्निहोत्री ने उस विचार का विरोध किया, जिसके तहत पर्यावरण संबंधी नियमों का उल्लंघन करने वाली परियोजनाओं को भारी जुर्माना चुकाने पर पिछली तारीख से पर्यावरण मंजूरी दे दी जाती है।
 
अग्निहोत्री ने जब रियो घोषणापत्र और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अन्य अंतरराष्ट्रीय समझौतों तथा उनके प्रस्तावों का हवाला दिया, तो पीठ ने कहा, ‘‘रियो घोषणा पत्र, पेरिस संधि और पर्यावरण संबंधी सभी अंतरराष्ट्रीय कानूनों के सामने यह चुनौती है कि विभिन्न राष्ट्र उनसे बचने की कोशिश कर रहे हैं।’’
 
न्यायालय ने कहा कि अमेरिका और चीन जैसे देश इन संधियों के प्रति उदासीन हैं और शायद ही कुछ करते हैं।
 
शीर्ष अदालत इस समय उन याचिकाओं के एक समूह पर फिर से सुनवाई कर रही है, जिनमें ‘वनशक्ति’ फैसले को चुनौती देने वाली पुनर्विचार याचिकाएं भी शामिल हैं।
 
न्यायालय के 2025 के फैसले ने शुरू में केंद्र को उन परियोजनाओं को पिछली तारीख से मंजूरी देने से रोक लगा दी थी, जिनमें अनिवार्य पर्यावरणीय स्वीकृतियों के बिना ही काम शुरू कर दिया गया था। हालांकि न्यायालय ने बाद में इस फैसले के अमल पर रोक लगा दी, ताकि सार्वजनिक निवेश के रूप में लगे हजारों करोड़ रुपये बर्बाद होने से बचाए जा सकें।