the Lok Sabha Speaker not to recognise the breakaway faction.
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) में बगावत की अटकलों के बीच पार्टी सांसद अरविंद सावंत ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से अनुरोध किया है कि पार्टी का प्रतिनिधित्व करने का दावा करने वाले किसी भी ‘‘बागी’’ गुट को मान्यता नहीं दी जाए।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब शिवसेना (उबाठा) के नौ में से कम से कम छह सांसदों के लोकसभा में अलग गुट बनाने की अटकलें तेज हो गई हैं।
सावंत ने कहा कि सदन में नेतृत्व तय करने, सचेतक नियुक्त करने और विधायी आचरण से जुड़े निर्देश जारी करने का अधिकार राजनीतिक दल से ही मिलता है।
उन्होंने मंगलवार रात लोकसभा अध्यक्ष को लिखे पत्र में कहा, ‘‘विधायी दल के पास राजनीतिक दल से स्वतंत्र कोई अधिकार नहीं होता।’’
पांच सांसदों ने शिवसेना (उबाठा) प्रमुख उद्धव ठाकरे द्वारा रविवार को बुलाई गई बैठक में व्यक्तिगत रूप से हिस्सा नहीं लिया और डिजिटल तरीके से शामिल हुए।
जहां सांसद अरविंद सावंत, अनिल देसाई, राजाभाऊ वाजे और संजय पाटिल बैठक में मौजूद रहे, वहीं ओमप्रकाश राजेनिंबालकर, भाऊसाहेब वाकचोरे, नागेश बापूराव पाटिल आष्टीकर और संजय देशमुख ऑनलाइन जुड़े।
शिवसेना (उबाठा) नेता संजय राउत के अनुसार, एक अन्य सांसद संजय जाधव ने फोन पर ठाकरे से बातचीत की।
सावंत ने पत्र में लिखा कि मीडिया में ऐसी खबरें आ रही हैं कि शिवसेना (उबाठा) के चुनाव चिह्न पर चुने गए कुछ सांसद अलग गुट की मान्यता या किसी अन्य दल में विलय के लिए लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय से संपर्क कर चुके हैं या ऐसा करने की योजना बना रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ये मामले सीधे राजनीतिक और विधायी दलों से जुड़ी संवैधानिक व्यवस्था से संबंधित हैं और अनुरोध किया कि उनके पत्र को आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा बनाया जाए।
सावंत ने कहा, ‘‘शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) को अब भी सदन में उसके विधिवत अधिकृत नेता और मुख्य सचेतक (व्हिप) के माध्यम से प्रतिनिधित्व करने वाले एक ही राजनीतिक दल के रूप में मान्यता प्राप्त है और पार्टी का प्रतिनिधित्व करने का दावा करने वाले किसी भी कथित गुट या अलग हुए समूह को कोई पृथक मान्यता, दर्जा, विशेषाधिकार या सुविधा नहीं दी जानी चाहिए।’’
उन्होंने यह भी अनुरोध किया कि यदि इस तरह का कोई प्रस्ताव आता है तो शिवसेना (उबाठा) को अपना पक्ष रखने का अवसर दिए बिना कोई निर्णय नहीं लिया जाए।