डीपीसीसी में चार वर्षों में रिक्त पद 187 से घटकर 62 हुए : आरटीआई

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 17-06-2026
DPCC vacancies reduced from 187 to 62 in four years: RTI
DPCC vacancies reduced from 187 to 62 in four years: RTI

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
 दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने पिछले चार वर्षों में अपनी कर्मचारी संख्या में उल्लेखनीय सुधार किया है। सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार, समिति में रिक्त पदों की संख्या 2022 में 187 से घटकर 2026 में 62 रह गई है।

पर्यावरण कार्यकर्ता अमित गुप्ता को आरटीआई के तहत मिले जवाब के मुताबिक, डीपीसीसी में स्वीकृत 344 पदों के मुकाबले वर्तमान में 282 कर्मचारी कार्यरत हैं। इस प्रकार 62 पद रिक्त हैं और समिति अपनी स्वीकृत क्षमता के लगभग 82 प्रतिशत स्तर पर काम कर रही है।
 
मई 2026 में प्राप्त आरटीआई जवाब के अनुसार, पिछले एक वर्ष के दौरान 56 कर्मचारियों की नियुक्ति की गई, जिनमें इस्तीफे और प्रतिनियुक्ति समाप्त होने से रिक्त हुए पद भी शामिल हैं। इसी अवधि में 10 कर्मचारी सेवानिवृत्त हुए।
 
समिति ने बताया कि उसके पास वर्तमान में 282 नियमित कर्मचारी और 67 संविदा कर्मचारी हैं। शेष रिक्त पदों को भरने के लिए भर्ती और नियुक्ति की प्रक्रिया जारी है।
 
आरटीआई जवाब के अनुसार, समूह ‘बी’ और ‘सी’ के पदों पर भर्ती के लिए प्रस्ताव दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (डीएसएसएसबी) को भेजे गए हैं, जबकि समूह ‘ए’ के पदों पर भर्ती की प्रक्रिया डीपीसीसी द्वारा की जा रही है।
 
ताजा आंकड़े जुलाई 2024 की स्थिति की तुलना में उल्लेखनीय सुधार दर्शाते हैं। उस समय आरटीआई के जरिए मिली जानकारी के अनुसार डीपीसीसी में 344 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 188 कर्मचारी कार्यरत थे और 156 पद रिक्त थे। तब संगठन अपनी स्वीकृत क्षमता के मात्र 54 प्रतिशत स्तर पर काम कर रहा था।
 
साल 2022 की तुलना में कर्मचारियों की संख्या में 125 की वृद्धि हुई है। अगस्त 2022 में प्राप्त आरटीआई जवाब के अनुसार उस समय डीपीसीसी में 344 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 157 कर्मचारी कार्यरत थे और 187 पद रिक्त थे। तब संगठन अपनी स्वीकृत क्षमता के लगभग 46 प्रतिशत स्तर पर काम कर रहा था।
 
अमित गुप्ता ने कहा, ‘‘हम 2022 से डीपीसीसी में कर्मचारियों की कमी का मुद्दा उठाते रहे हैं और यह अत्यंत सकारात्मक प्रगति है, विशेषकर दिल्ली जैसे शहर के लिए जो देश की सबसे गंभीर वायु प्रदूषण चुनौतियों का सामना करता है।’’
 
उन्होंने कहा कि निरीक्षण, पर्यावरण निगरानी, प्रवर्तन कार्रवाई, शिकायत निवारण और प्रदूषण नियंत्रण उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पर्याप्त मानव संसाधन आवश्यक हैं।