सरकार का 2032 तक 3-नैनोमीटर चिप निर्माण का लक्ष्य

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 27-01-2026
The government aims to manufacture 3-nanometer chips by 2032.
The government aims to manufacture 3-nanometer chips by 2032.

 

नई दिल्ली

सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि भारत सरकार का लक्ष्य 2032 तक अत्याधुनिक 3-नैनोमीटर नोड वाले चिप का डिजाइन और विनिर्माण करने का है। ये चिप स्मार्टफोन, कंप्यूटर और अन्य उच्च तकनीक वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में इस्तेमाल की जाएगी और देश को सेमीकंडक्टर उत्पादन में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मक बनाएगी।

मंत्री ने कहा कि सरकार डिजाइन-आधारित प्रोत्साहन (डीएलआई) योजना के दूसरे चरण के तहत छः प्रमुख श्रेणियों—कंप्यूट, रेडियो फ्रीक्वेंसी (आरएफ), नेटवर्किंग, ऊर्जा, सेंसर और मेमोरी—पर विशेष ध्यान केंद्रित करेगी। इसका उद्देश्य देश की चिप डिज़ाइन कंपनियों को लगभग 70–75 प्रतिशत प्रौद्योगिकी उत्पादों के विकास पर मुख्य नियंत्रण देना है।

डीएलआई योजना के अंतर्गत चयनित 24 चिप डिज़ाइन कंपनियों के साथ बैठक के बाद मंत्री ने कहा, “आज हम डिज़ाइन के क्षेत्र में आगे बढ़ चुके हैं, लेकिन हमारी चुनौती 3-नैनोमीटर चिप के विनिर्माण स्तर तक पहुंचने की है। 2032 तक हमारा लक्ष्य यही है कि भारत पूरी तरह सक्षम हो और उच्च तकनीक वाले चिप का निर्माण कर सके।”

अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सरकार का दृष्टिकोण केवल विनिर्माण तक सीमित नहीं है। वे शिक्षा और उद्योग के सहयोग से इन छह प्रमुख क्षेत्रों में नए विचार, नवाचार और समाधान लाने के लिए कंपनियों को प्रोत्साहित करना चाहते हैं। उनका कहना था, “जैसे-जैसे हम 2029 की ओर बढ़ेंगे, हमारे पास ऐसे चिप डिजाइन और विनिर्माण करने की क्षमता विकसित हो जाएगी, जो देश में लगभग 70–75 प्रतिशत अनुप्रयोगों में इस्तेमाल हो सकें।”

मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में हर तकनीकी क्षेत्र में इन छह प्रकार के चिप का कोई न कोई संयोजन आवश्यक होगा। इससे भारत के सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में मदद मिलेगी और नई पीढ़ी के इंजीनियरों व डिजाइनरों को उच्च तकनीक वाले चिप में महारत हासिल करने का अवसर मिलेगा।

वैष्णव ने जोर देकर कहा कि डीएलआई योजना के तहत देश की चिप डिजाइन और विनिर्माण क्षमता को व्यापक और समग्र रूप से विकसित किया जाएगा। उनका मानना है कि इससे न केवल भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, बल्कि वैश्विक चिप मार्केट में भारत की हिस्सेदारी भी मजबूत होगी।