मानहानि मामले में न्यायालय ने आतिशी और केजरीवाल की याचिका पर सुनवाई 21 अप्रैल तक स्थगित की

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 27-01-2026
In the defamation case, the court adjourned the hearing on Atishi and Kejriwal's petition until April 21.
In the defamation case, the court adjourned the hearing on Atishi and Kejriwal's petition until April 21.

 

नई दिल्ली

उच्चतम न्यायालय ने आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी की याचिका पर सुनवाई 21 अप्रैल तक स्थगित कर दी है। ये याचिका उस आदेश को चुनौती दे रही है, जिसमें निचली अदालत ने उनके खिलाफ दायर मानहानि के मामले को रद्द करने से इनकार किया था। मामला उन कथित टिप्पणियों से जुड़ा है, जिनमें उन्होंने मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर आलोचनात्मक बयान दिए थे।

न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन. के. सिंह की पीठ ने कहा कि मामले में विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता है, इसलिए सुनवाई को आगामी अप्रैल तक स्थगित किया गया। वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा, जो आप नेताओं की ओर से पेश हुईं, ने बताया कि पीठ ने कहा था कि यह मामला नियमित सुनवाई दिनों (मंगलवार, बुधवार और बृहस्पतिवार) में सुना जाना चाहिए।

केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस. वी. राजू ने बताया कि मानहानि का मामला एक राजनीतिक दल से जुड़ा हुआ है, जिसने शिकायतकर्ता को याचिका दायर करने का अधिकार दिया है।

इस मामले की पृष्ठभूमि यह है कि राजीव बब्बर, भाजपा के दिल्ली इकाई के सदस्य, ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी के नेताओं ने मतदाताओं के नाम हटाने के आरोप लगाकर भाजपा की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया। दिसंबर 2018 में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में AAP नेताओं ने दावा किया कि भाजपा के निर्देश पर निर्वाचन आयोग ने बनिया, पूर्वांचली और मुस्लिम समुदाय के लगभग 30 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मामले में कहा था कि ये आरोप प्रथम दृष्टया “मानहानिकारक” हैं और भाजपा को बदनाम करने तथा अनुचित राजनीतिक लाभ लेने के इरादे से लगाए गए। उच्च न्यायालय ने आतिशी, केजरीवाल और अन्य आप नेताओं की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 के तहत निचली अदालत द्वारा पारित समन आदेश में किसी प्रकार के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।

आम आदमी पार्टी के नेताओं ने सत्र न्यायालय के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें मजिस्ट्रेट अदालत के फैसले को बरकरार रखा गया था। ये आदेश 15 मार्च 2019 और 28 जनवरी 2020 को पारित हुए थे।

न्यायालय की स्थगित सुनवाई के बाद अब इस मामले में 21 अप्रैल 2026 को पुनः सुनवाई होगी। इसके दौरान दोनों पक्षों के तर्कों और दस्तावेजों की विस्तारपूर्वक समीक्षा की जाएगी, जिससे इस राजनीतिक और कानूनी विवाद का निष्पक्ष समाधान सुनिश्चित किया जा सके।