the Dalit harassment case and ensure strict punishment for all the culprits.
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने गुजरात के ऊना में दलित की पिटाई के मामले में 35 आरोपियों के बरी होने पर राज्य सरकार पर दलितों के प्रति द्वेषपूर्ण रवैया और लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अभी भी मौका है और सरकार को उच्च न्यायालय में प्रभावी पैरवी कर सभी दोषियों को कड़ी सजा दिलानी चाहिए।
गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के वेरावल स्थित विशेष न्यायालय ने इस वर्ष 16 मार्च को 2016 के चर्चित ऊना दलित पिटाई मामले में पांच लोगों को दोषी ठहराया था, जबकि 35 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था। इस मामले में मृत गाय की खाल उतार रहे चार दलित युवकों की बेरहमी से पिटाई की गई थी। इस घटना के बाद देशभर में व्यापक विरोध-प्रदर्शन हुए थे।
मायावती ने शुक्रवार को सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, ‘‘गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के ऊना में 2016 में दलितों पर हुए जघन्य अत्याचार के मामले में लगभग सभी अभियुक्तों को मार्च में स्थानीय न्यायालय द्वारा बरी किए जाने के फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देने के लिए पीड़ित दलित परिवारों को आर्थिक सहित अनेक गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह विचलित करने वाली सच्चाई से खासकर बहुजन समाज के लोगों में गहरी चिंता का विषय है। मेरी चिंता का एक प्रमुख कारण यह भी है कि मैं स्वयं पीड़ितों से मिलने गई थी और सच्चाई जानने के बाद मैंने राज्य सरकार से सभी दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की थी।’’
बसपा प्रमुख ने कहा, ‘‘देशभर में भारी जनाक्रोश के बावजूद 40 में से 35 आरोपियों का मार्च में बरी हो जाना दलितों के प्रति सरकारी द्वेष तथा उनके हितों और सुरक्षा के प्रति लापरवाही एवं उदासीनता का ही परिणाम प्रतीत होता है।’’
उन्होंने गुजरात सरकार से आग्रह करते हुए कहा, ‘‘अभी भी मौका है। सरकार अपनी गलती सुधारते हुए इस मामले में उच्च न्यायालय के समक्ष प्रभावी पैरवी करे, ताकि सभी दोषियों को कड़ी सजा मिल सके। इससे पीड़ितों को न्याय मिलेगा और समाज में ऐसा अपराध करने वालों के लिए कड़ा संदेश जाएगा।’’