The aim of increasing securities transaction tax in futures and options trading is to curb speculation: Sitharaman
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि सरकार का वायदा और विकल्प कारोबार पर प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) बढ़ाने का निर्णय राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से नहीं लिया गया है, बल्कि इसका मकसद छोटे निवेशकों को सट्टेबाजी में होने वाले भारी नुकसान से बचाना है।
सीतारमण ने पीटीआई वीडियो को दिए साक्षात्कार में एक अध्ययन का हवाला देते हुए कहा कि वायदा एवं विकल्प कारोबार (एफ एंड ओ) बाजार में आने वाले वाले 90 प्रतिशत से अधिक लोगों को भारी नुकसान हुआ है। सरकार ने इस तरह के वायदा एवं विकल्प कारोबार पर एसटीटी बढ़ाने का निर्णय लेते समय व्यापक जनहित को ध्यान में रखा है।
वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में वायदा अनुबंधों पर एसटीटी को 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। विकल्प प्रीमियम और विकल्प के प्रयोग पर एसटीटी को मौजूदा क्रमश: 0.1 प्रतिशत और 0.125 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है।
सीतारमण ने कहा कि वित्त मंत्रालय को सैकड़ों लोगों के फोन आते रहे हैं और वे सरकार से हस्तक्षेप की मांग करते रहे हैं ताकि छोटे निवेशकों को तत्काल वायदा एवं विकल्प (एफ एंड ओ) खंड में नुकसान होने से बचाया जा सके। उन्होंने कहा, ‘‘यह कदम (वायदा कारोबार में एसटीटी की बढ़ोतरी) राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से नहीं उठाया गया है।
जब उनसे पूछा गया कि क्या सरकार एसटीटी बढ़ाने के बजाय निवेशकों के लिए वायदा एवं विकल्प कारोबार में भाग लेने की सीमा तय कर सकती थी, सीतारमण ने कहा कि यह बढ़ोतरी एक पाबंदी और निवारक के रूप में काम करेगी।
मंत्री ने कहा, ‘‘सरकार जब भी कोई कदम उठाती है, तो वह आम जनता को ध्यान में रखकर उठाती है...।’’
वित्त वर्ष 2024-25 में शेयर वायदा एवं विकल्प खंड में कारोबार करने वाले व्यक्तिगत निवेशकों की संख्या 1.06 करोड़ थी, जो वित्त वर्ष 2025-26 (30 दिसंबर, 2025 तक) में घटकर लगभग 75.43 लाख रह गई।