एमएससी हिस्सेदारी सौदे पर थरूर की चिंता

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 03-07-2026
Tharoor expresses concern over MSC stake deal
Tharoor expresses concern over MSC stake deal

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
 
 
 ‘अदाणी विड़िण्गम पोर्ट प्राइवेट लिमिटेड’ (एवीपीपीएल) में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी स्विट्जरलैंड की प्रमुख पोत परिवहन कंपनी ‘मेडिटेरेनियन शिपिंग कंपनी’ (एमएससी) को बेचने के प्रस्ताव पर जारी विवाद के बीच कांग्रेस नेता एवं सांसद शशि थरूर ने शुक्रवार को कहा कि चीनी कंपनियों की संभावित भागीदारी को लेकर चिंताओं के कारण संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग), दोनों की सरकारों के दौरान इस परियोजना के लिए कई बार बोली लगाने वाले नहीं मिल पाए थे।
 
तिरुवनंतपुरम से सांसद थरूर ने कहा कि हिस्सेदारी के किसी भी हस्तांतरण के लिए केंद्र और केरल सरकार, दोनों की सहमति जरूरी होगी क्योंकि यह बंदरगाह राष्ट्रीय महत्व की रणनीतिक संपत्ति है और राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि है।
 
उन्होंने कहा, ‘‘आपको याद होगा कि परियोजना के लिए निविदा को मंजूरी मिलने से पहले, चीनी कंपनियों की संभावित भागीदारी के कारण बोली प्रक्रिया तीन-चार बार सफल नहीं हो पाई थी।’’
 
थरूर ने कहा, ‘‘इसी वजह से केंद्र की कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), दोनों की सरकारों ने मंजूरी नहीं दी थी। इसलिए, सरकारों की सहमति के बिना कोई अंतिम फैसला नहीं लिया जाना चाहिए। मेरा भी यही विचार है।’’
 
उन्होंने कहा कि कोई भी बंदरगाह की प्रगति और विकास के खिलाफ नहीं है लेकिन इसे राज्य सरकार के साथ किए गए रियायत समझौते के अनुरूप आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
 
थरूर ने दिल्ली में संवाददाताओं से कहा, ‘‘केंद्र और राज्य सरकार, दोनों से संबंधित मंजूरियां मिलने के बाद ही हिस्सेदारी की ऐसी बिक्री या हस्तांतरण को मंजूरी दी जा सकती है। यही सामान्य कानूनी प्रक्रिया है। मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन और विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने भी यही कहा है।’’
 
उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए प्रक्रिया को आगे बढ़ने दिया जाना चाहिए।’’
 
थरूर ने कहा कि इस बंदरगाह से राज्य का भी हित जुड़ा है क्योंकि उसने इसके लिए जमीन दी है और इसका निर्माण दुनिया की सभी पोत परिवहन कंपनियों की जरूरतें पूरी करने के उद्देश्य से किया गया था।
 
उन्होंने कहा, ‘‘भविष्य में ऐसी स्थिति नहीं होनी चाहिए कि यहां केवल एमएससी के पोत ही आ सकें। हम चाहते हैं कि यह बंदरगाह कई पोत परिवहन कंपनियों के लिए खुला रहे।’’
 
थरूर ने साथ ही स्पष्ट किया कि किसी का भी विरोध नहीं किया जा रहा है और बंदरगाह का विकास जरूरी है।
 
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन विकास कानून के अनुरूप और रियायत समझौते की शर्तों का सम्मान करते हुए होना चाहिए। आगे बढ़ने का यही एकमात्र रास्ता है। सरकार सभी पहलुओं का अध्ययन करने के बाद फैसला करेगी।’’