पीएम किसान सम्मान निधि की 24वीं किस्त जारी, करीब 9.34 करोड़ किसान परिवारों को लाभ

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 31-10-2026
24th installment of PM Kisan Samman Nidhi released; around 9.34 crore farmer families to benefit
24th installment of PM Kisan Samman Nidhi released; around 9.34 crore farmer families to benefit

 

नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों को विकसित भारत का सबसे मजबूत स्तंभ बताते हुए कहा कि किसानों का कल्याण और सशक्तीकरण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने शुक्रवार को गुजरात के बनासकांठा जिले से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम किसान) योजना की 24वीं किस्त जारी की। इसके तहत देशभर के 9.34 करोड़ से अधिक किसान परिवारों के बैंक खातों में 18,680 करोड़ रुपये से ज्यादा की सहायता राशि भेजी गई।

राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित पीएम किसान उत्सव दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री ने 14 हजार करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया। इनमें डेयरी, कृषि, पशुपालन, रेलवे, मेट्रो, आंगनवाड़ी और अन्य बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं।

गुजरात के 52 लाख से अधिक किसान परिवारों को सहायता

पीएम किसान योजना की 24वीं किस्त के तहत गुजरात के 52.33 लाख से अधिक किसान परिवारों के खातों में 1,051 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि भेजी गई। बनासकांठा जिले के हजारों किसान परिवारों को भी इसका लाभ मिला।

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश का कृषि बजट 2013-14 की तुलना में पांच गुना से अधिक बढ़ चुका है। छोटे किसानों के जीवन में पीएम किसान योजना की महत्वपूर्ण भूमिका है।

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में किसानों के हित में बनाई गई नीतियों और फैसलों से उन्हें 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय लाभ या बचत हुई है।

प्रधानमंत्री ने इसके समर्थन में पांच प्रमुख योजनाओं और फैसलों का उल्लेख किया। उनके अनुसार, पीएम किसान के तहत छोटे किसानों के बैंक खातों में करीब 4.5 लाख करोड़ रुपये सीधे भेजे गए हैं। देश के 85 प्रतिशत से अधिक किसान छोटे किसान हैं।

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद किसानों को राहत देने के लिए सरकार ने लगभग 16 लाख करोड़ रुपये उर्वरक सब्सिडी पर खर्च किए। गेहूं और धान की एमएसपी खरीद के तहत पिछले 12 वर्षों में 24 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत भी पिछले 10 से 12 वर्षों में किसानों को दो लाख करोड़ रुपये से अधिक का बीमा मुआवजा मिलने की बात कही गई। पीएम कुसुम योजना के तहत लगभग 12 लाख सौर पंप वितरित किए गए हैं। इससे सिंचाई की लागत कम करने और डीजल पर निर्भरता घटाने में मदद मिली है।

पशुपालन और डेयरी क्षेत्र पर जोर

प्रधानमंत्री ने कहा कि खेती केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि भारत की परंपरा और संस्कृति का हिस्सा है। सरकार कृषि और पशुपालन में विज्ञान तथा तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है।

उन्होंने बताया कि किसानों को अब तक 26 करोड़ से अधिक सॉइल हेल्थ कार्ड उपलब्ध कराए गए हैं। जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए हाल के वर्षों में बीजों की लगभग 3,000 नई किस्में भी उपलब्ध कराई गई हैं।

पशुपालन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में ग्रामीण महिलाओं का योगदान उल्लेखनीय है। बेहतर नस्ल, समय पर टीकाकरण और उचित इलाज से पशुओं की उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है।

बनासकांठा में स्थापित भारत बोवाइन ब्रीडिंग एंड रिसर्च सेंटर (बीबीबीआरसी) का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह केंद्र गिर, साहीवाल और कांकरेज जैसी देसी गायों तथा मेहसाणा, मुर्रा और जाफराबादी जैसी भैंसों की नस्लों के संरक्षण और आनुवंशिक सुधार में योगदान देगा। कांकरेज नस्ल को समर्पित यह देश का पहला ऐसा अनुसंधान केंद्र होगा।

उन्होंने कहा कि इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) जैसी आधुनिक तकनीक से अधिक दूध देने वाले, स्वस्थ और कम देखभाल की जरूरत वाले पशुओं की बेहतर नस्ल तैयार करने में मदद मिल रही है।

प्रधानमंत्री के अनुसार, मुंहपका-खुरपका रोग जैसी बीमारियों से बचाव के लिए देशभर में मुफ्त टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। अब तक लगभग 150 करोड़ टीके लगाए जा चुके हैं। इससे आठ करोड़ से अधिक पशुपालकों को लाभ मिलने की बात कही गई।

उन्होंने बताया कि 2013-14 में गाय या भैंस से औसतन प्रतिदिन पांच लीटर से कम दूध मिलता था। अब यह बढ़कर लगभग आठ लीटर हो गया है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश बन चुका है।

गोबर और कृषि अवशेष से भी आय बढ़ाने की कोशिश

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य पशुपालकों की आय को केवल दूध तक सीमित नहीं रखना है। गोबर और कृषि अवशेषों से भी कमाई के रास्ते विकसित किए जा रहे हैं।

इसके लिए बायोगैस, बायो-सीएनजी और जैविक खाद उत्पादन से जुड़ा बुनियादी ढांचा तैयार किया जा रहा है। बनास डेयरी के सहयोग से थराद और राधनपुर में दो नए कंप्रेस्ड बायोगैस संयंत्रों की आधारशिला रखी गई।

उन्होंने कहा कि पशुपालन को पारंपरिक पेशे से आगे बढ़ाकर किसानों की आमदनी और ग्रामीण समृद्धि का मजबूत माध्यम बनाया जा रहा है।

मछली पालन और मधुमक्खी पालन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा

प्रधानमंत्री ने ग्रामीण समृद्धि के लिए मछली पालन, मधुमक्खी पालन और सहकारिता क्षेत्र की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत का समुद्री खाद्य निर्यात दोगुने से अधिक हो गया है।

मधुमक्खी पालन को किसानों की अतिरिक्त आय का महत्वपूर्ण साधन बताते हुए उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश में शहद का उत्पादन दोगुना हुआ है। इस क्षेत्र में महिला स्वयं सहायता समूहों का योगदान भी महत्वपूर्ण है। भारत प्राकृतिक शहद का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक बन गया है।

बनासकांठा में विकास परियोजनाओं की सौगात

प्रधानमंत्री ने बनास डेयरी के नए आलू विस्तार संयंत्र और यूएचटी-एएसआरएस सुविधा का वर्चुअल उद्घाटन किया। आलू प्रसंस्करण संयंत्र की क्षमता बढ़ाने से किसानों से अधिक आलू खरीदने में मदद मिलेगी। इससे आलू उत्पादकों को लाभ होने की उम्मीद है।

फल और सब्जी उत्पादकों के लिए क्लस्टर विकास कार्यक्रम के तहत टमाटर, आलू, मिर्च, अंगूर, केला, प्याज, संतरा, अनार और कोको जैसी फसलों के लिए 12 क्लस्टर मंजूर किए गए हैं। उत्तर गुजरात में स्वीकृत दो क्लस्टरों से बनासकांठा और साबरकांठा के आलू किसानों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है।

प्रधानमंत्री ने दो नई रेल सेवाओं को भी हरी झंडी दिखाई। इनमें अहमदाबाद-वाराणसी साबरमती एक्सप्रेस और मेहसाणा-बेचाराजी-साबरमती मेमू ट्रेन शामिल हैं।

अहमदाबाद मेट्रो के विस्तार के तहत गिफ्ट सिटी और हवाई अड्डे को जोड़ने वाली परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई। अहमदाबाद-मेहसाणा राजमार्ग को चार लेन से आठ लेन में बदलने की योजना भी सामने रखी गई।

गुजरात में 4,000 से अधिक आधुनिक आंगनवाड़ियों का उद्घाटन किया गया। इनसे लगभग चार लाख बच्चों और गर्भवती महिलाओं को लाभ मिलने की बात कही गई।

खाद की कमी की अफवाहों पर प्रधानमंत्री का बयान

प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक संकट के बीच भारत एकजुट होकर चुनौतियों का सामना कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ तत्व किसानों के बीच खाद की कमी और महिलाओं के बीच एलपीजी की किल्लत को लेकर अफवाहें फैलाकर भय का माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार ने संकट के दौरान भी किसानों को खाद और कृषि संबंधी आवश्यकताओं की कमी नहीं होने दी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरक और कच्चे माल की कीमतें बढ़ने के बावजूद इसका बोझ भारतीय किसानों पर नहीं पड़ने दिया गया।

प्रधानमंत्री के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगभग 3,000 रुपये की यूरिया की बोरी किसानों को 300 रुपये से कम में उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में 5,000 रुपये से अधिक कीमत वाली डीएपी की बोरी किसानों को 1,350 रुपये में दी जा रही है।

गुजरात के विकास और 25 साल के सार्वजनिक जीवन का जिक्र

प्रधानमंत्री ने अपने सार्वजनिक जीवन के सफर का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने 7 अक्टूबर 2001 को पहली बार सरकार के प्रमुख के रूप में शपथ ली थी। इस वर्ष 7 अक्टूबर को सार्वजनिक सेवा के 25 वर्ष पूरे हुए।

उन्होंने गुजरात के लोगों से मिले सहयोग और मार्गदर्शन के प्रति आभार जताया। बनासकांठा और उत्तर गुजरात में पहले पानी तथा बिजली की कमी का उल्लेख करते हुए उन्होंने जल और ऊर्जा संरक्षण की अपील भी की।

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री से प्रेरित होकर देश को 26,092 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं की सौगात मिली है। उन्होंने पशुपालन अनुसंधान केंद्र को क्षेत्र के पशुपालकों के लिए महत्वपूर्ण बताया।

उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी और गुजरात विधानसभा अध्यक्ष शंकर चौधरी ने भी क्षेत्र में सिंचाई, बिजली, डेयरी और पशुपालन के विकास का उल्लेख किया।

प्रधानमंत्री ने 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर आयोजित रन फॉर यूनिटी में लोगों, खासकर युवाओं से भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल से प्रेरित राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करना सभी की जिम्मेदारी है।