दहेज के खिलाफ शाहपुर गांव की बड़ी पहल, शादी में शामिल होंगे सिर्फ 5 लोग

Story by  अर्सला खान | Published by  [email protected] | Date 31-10-2026
Sultanpur, UP: Shahpur village takes a major initiative against dowry, with only five people attending the wedding.
Sultanpur, UP: Shahpur village takes a major initiative against dowry, with only five people attending the wedding.

 

अर्सला खान/नई दिल्ली

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के गांव शाहपुर सरकण्डेडीह के मुस्लिम समुदाय ने दहेज प्रथा के खिलाफ एक सख्त कदम उठाया है। गांव की जामा मस्जिद में हुई बैठक में शादी-विवाह को सादा बनाने, दहेज के लेन-देन पर रोक लगाने और अनावश्यक खर्चों को कम करने के लिए कई अहम प्रस्ताव पारित किए गए। गांव के लोगों का उद्देश्य है कि शादी को दिखावे और आर्थिक बोझ से मुक्त कर समाज में एक सकारात्मक मिसाल पेश की जाए। दहेज प्रथा पर रोक लगाने के लिए गांव की जामा मस्जिद में प्रस्ताव पारित, सादगी से शादी करने और शरीयत के मुताबिक चलने का लिया गया फैसला
 
शादी में शामिल होंगे सिर्फ 5 लोग

गांव में लिए गए फैसले के मुताबिक, शादी के लिए लड़के वालों की ओर से अधिकतम पांच लोग ही लड़की वालों के यहां जाएंगे। इसके साथ ही यह भी तय किया गया है कि गांव का कोई भी व्यक्ति लड़की वालों के घर जाकर खाना नहीं खाएगा। इन नियमों के पीछे मकसद शादी के दौरान होने वाले अनावश्यक खर्च और लड़की के परिवार पर पड़ने वाले आर्थिक दबाव को कम करना है।
 
 
दहेज के लिए नहीं बनाया जाएगा दबाव

बैठक में यह भी फैसला लिया गया कि किसी भी लड़की के परिवार पर दहेज देने का दबाव नहीं बनाया जाएगा। दहेज की मांग को हतोत्साहित करते हुए समुदाय ने शादी को आपसी सहमति, सादगी और सम्मान के साथ संपन्न कराने पर जोर दिया है। यह पहल उन परिवारों के लिए राहत की उम्मीद बन सकती है, जो सामाजिक दबाव के कारण शादी में अपनी क्षमता से अधिक खर्च करने को मजबूर हो जाते हैं।
 
नियम तोड़ने वालों के बहिष्कार का फैसला

गांव में पारित प्रस्ताव के अनुसार, यदि कोई परिवार शादी के लिए पांच से अधिक लोगों को लेकर जाता है, तो उसके खिलाफ सामाजिक बहिष्कार की कार्रवाई की जाएगी। इस फैसले का उद्देश्य गांव के सभी लोगों को तय किए गए नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित करना है।
 

पूरे देश के लिए बन सकती है मिसाल

शादी-विवाह में दहेज और दिखावे के कारण कई परिवारों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में शाहपुर सरकण्डेडीह के लोगों की यह पहल सामाजिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा सकती है। यदि इस तरह के प्रयास दूसरे गांवों और समुदायों में भी अपनाए जाते हैं, तो शादी को सादगीपूर्ण बनाने और दहेज के दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है।