तावडे की मुझसे मुलाक़ात एक शिष्टाचार भेंट थी : खडसे

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 09-07-2026
Tawde's meeting with me was a courtesy call: Khadse
Tawde's meeting with me was a courtesy call: Khadse

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
 भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता विनोद तावडे की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद चंद्र पवार) के विधान परिषद सदस्य एकनाथ खडसे से हाल की मुलाकात के बाद तरह तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, खडसे ने इसे महज शिष्टाचार भेंट बताया और इसके किसी भी राजनीतिक महत्व को खारिज किया।

खडसे ने बुधवार को कहा, ‘‘विनोद तावडे केंद्रीय मंत्री रक्षा खडसे के मुंबई स्थित आवास आए थे, जहां यह मुलाकात हुई। यह कोई राजनीतिक बैठक नहीं थी। वह केवल मेरा हालचाल जानने आए थे। यह महज सद्भावना और शिष्टाचार भेंट थी।’’
 
यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब भाजपा और शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा (शरद चंद्र पवार) के वरिष्ठ नेताओं के बीच हाल की मुलाकात की खबरों के बाद तरह तरह की चर्चा जारी है।
 
रक्षा खडसे केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल राज्य मंत्री हैं। वह एकनाथ खडसे की पुत्रवधू हैं।
 
अटकलों को उस खबर से भी बल मिला है, जिसमें कहा गया कि तावडे और राकांपा (शरद चंद्र पवार) की महाराष्ट्र इकाई के पूर्व अध्यक्ष जयंत पाटिल की हाल में मुंबई में मुलाकात हुई थी। पाटिल ने बैठक की पुष्टि की, लेकिन कहा कि बातचीत अनौपचारिक थी।
 
सूत्रों के हवाले से आई खबरों के अनुसार, तावडे और पाटिल की यह मुलाकात महाराष्ट्र में शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा के सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के साथ संभावित राजनीतिक समीकरणों की अटकलों के बीच हुई। हालांकि, इस संबंध में किसी भी पक्ष की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
 
करीब चार दशक तक भाजपा में रहे खडसे ने अक्टूबर 2020 में पार्टी छोड़ दी थी। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि तत्कालीन मतभेदों के कारण उन्होंने पार्टी छोड़ी, जिनमें मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और मंत्री गिरीश महाजन के साथ उनके मतभेद भी शामिल थे। इसके बाद वह उस समय अविभाजित रही शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए और बाद में विधान परिषद के लिए निर्वाचित हुए।
 
फडणवीस के नेतृत्व वाली 2014-19 की सरकार में खडसे को 2016 में भ्रष्टाचार और कथित भूमि सौदे में अनियमितता के आरोपों के बाद राजस्व मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
 
जून 2023 में तावडे ने सार्वजनिक रूप से खडसे से भाजपा में लौटने की अपील करते हुए कहा था कि पार्टी को उनके जैसे अनुभवी नेता की जरूरत है। उस समय तावडे ने यह भी कहा था कि खडसे का बेबाक अंदाज भले ही हमेशा पार्टी के भीतर स्वीकार्य न हो, लेकिन वह उन नेताओं में शामिल हैं जिन्हें भाजपा फिर से अपने साथ देखना चाहती है।
 
तावडे राज्यसभा सदस्य और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव हैं।