नई दिल्ली
'तहलका' मैगज़ीन के पूर्व एडिटर तरुण तेजपाल ने अपनी जूनियर सहयोगी के साथ रेप के मामले में दोषी ठहराए जाने और दस साल की सज़ा के खिलाफ़ सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है। बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच ने 6 अगस्त को तेजपाल को एक पूर्व सहयोगी के साथ रेप का दोषी ठहराया और उन्हें 10 साल की जेल की सज़ा सुनाई। कोर्ट ने एक दशक पुराने मामले में 2021 में उन्हें बरी किए जाने के फैसले को पलट दिया। तेजपाल ने हाई कोर्ट के इस आदेश को चुनौती दी है। गोवा सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इस मामले में तेजपाल की सज़ा बढ़ाने की मांग की है।
राज्य सरकार ने 10 साल की कठोर सज़ा को बढ़ाने की मांग की है। सरकार का कहना है कि यह सज़ा अपर्याप्त है और उसने पूर्व एडिटर के लिए उम्रकैद की मांग की है। हाई कोर्ट ने यह फैसला गोवा सरकार की उस अपील पर सुनाया था जिसमें 2021 में गोवा सेशंस कोर्ट द्वारा तेजपाल को बरी किए जाने को चुनौती दी गई थी। यह मामला एक महिला पत्रकार के आरोपों से जुड़ा है, जिन्होंने आरोप लगाया था कि 2013 में पणजी में एक ऑफिशियल इवेंट के दौरान 7 और 8 नवंबर को होटल की लिफ्ट में तेजपाल ने उनका यौन उत्पीड़न किया था। इन आरोपों के चलते तेजपाल को 30 नवंबर 2013 को गिरफ्तार किया गया था।
29 सितंबर 2017 को उन पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय किए गए, जिनमें रेप, यौन उत्पीड़न और गलत तरीके से बंधक बनाना शामिल था। हालांकि, उन्होंने खुद को निर्दोष बताया। मई 2021 में, गोवा सेशंस कोर्ट ने तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि अभियोजन पक्ष मामले को बिना किसी संदेह के साबित करने में विफल रहा है। ट्रायल कोर्ट ने मेडिकल सबूतों की कमी का ज़िक्र किया और शिकायतकर्ता व तेजपाल के बीच हुए मैसेज के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला कि वे इस दावे का समर्थन नहीं करते कि कथित हमले से वह सदमे में थीं। इसके बाद गोवा सरकार ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को रद्द करने की मांग करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट में बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी।