आवाज द वाॅयस /नई दिल्ली
भारत में नक्सलवाद को मिटाने की कोशिशों में सुरक्षा बलों ने अब तक बड़ी कार्रवाई की है। सरकार ने साफ लक्ष्य रखा है कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद को देश से खत्म किया जाए। इसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए सघन अभियान जारी है और इस दौरान करीब 300 नक्सली सुरक्षा बलों के निशाने पर हैं।
इन नक्सलियों में प्रतिबंधित कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के चार शीर्ष केंद्रीय समिति के सदस्य शामिल हैं। इन नेताओं के नाम मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर, देवजी उर्फ कुंभा दादा उर्फ चेतन, राममन्ना उर्फ गणपति उर्फ लक्ष्मण राव और मल्लाह राजा रेड्डी उर्फ सागर बताए गए हैं।
हाल ही में खुफिया जानकारी के आधार पर सुरक्षा बलों ने छत्तीसगढ़‑तेलंगाना सीमा इलाके में बड़े स्तर पर अभियान शुरू किया। खबर है कि देवजी और उसका सहयोगी केसा सोढ़ी इसी इलाके में सक्रिय हैं, जबकि रेड्डी ओडिशा में छिपा हुआ है।
सुरक्षाबलों का कहना है कि इन शीर्ष कमांडरों सहित कुल 300 नक्सलियों को या तो आत्मसमर्पण कर देना चाहिए या फिर अभियान के दौरान उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यह अभियान मार्च 2026 की समयसीमा के भीतर नक्सलवाद के खात्मे के लक्ष्य को पूरा करने का एक अहम हिस्सा है।
घरेलू सुरक्षा नीति के अनुसार नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या में भी कमी आई है। गृह मंत्रालय ने बताया है कि नक्सल प्रभावित जिलों को 18 से घटाकर अब 11 किया गया है, और अधिकतर गंभीर रूप से प्रभावित इलाके अब सिर्फ छत्तीसगढ़ के बियापुर, सुकमा और नारायणपुर में सीमित हैं।
इतना ही नहीं, साथ ही नक्सलियों के खिलाफ सशक्त अभियान के दौरान पिछले समय में कई हाई‑प्रोफाइल नक्सली नेताओं के खात्मे और आत्मसमर्पण की खबरें भी आई हैं। राष्ट्रीय स्तर पर छापेमारी, अभियान और गांवों में सुरक्षा बल की पैठ बढ़ाने के कारण सैंकड़ों नक्सलियों ने हथियार भी जमा किए हैं और हथियारबंद संगठन कमजोर होता जा रहा है।
सरकार और सुरक्षा बलों की रणनीति दो भागों में काम कर रही है। एक तरफ सक्रिय नक्सलियों को निशाने पर रखा जा रहा है, तो दूसरी तरफ आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को पुनर्वास और मुख्यधारा में लाने की पहल भी की जा रही है। इससे हिंसा को कम करने और समाज में शांति कायम करने की कोशिशें तेज हुई हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि यह आखिरी बचे नक्सली संगठन को नष्ट करने का मौका है। अगर मार्च 2026 तक इन अभियानों का प्रभाव जारी रहा, तो लंबे समय से देश के कुछ हिस्सों में फैलता रहा नक्सलवाद काफी हद तक खत्म हो सकता है।