दर्जी की बेटी बनी चेन्नई टॉपर, 497 अंक हासिल कर चमकी आयिशा
Story by ओनिका माहेश्वरी | Published by onikamaheshwari | Date 21-05-2026
Tailor's Daughter Becomes Chennai Topper; Ayesha Shines with 497 Marks.
ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली
चेन्नई की एक साधारण सी गली में रहने वाले दर्जी एम. काजा मोहिदीन की जिंदगी सिलाई मशीन की आवाज़ों के बीच गुजरती रही। सुबह से देर रात तक कपड़े सिलते हुए उनका एक ही सपना था — उनकी बेटी वह मुकाम हासिल करे, जो वह खुद कभी नहीं कर सके। सीमित आमदनी, किराए का घर और हर महीने की आर्थिक परेशानियों के बावजूद उन्होंने अपनी बेटी आयिशा थंसीम की पढ़ाई में कभी कोई कमी नहीं आने दी।
इसी मेहनत, त्याग और भरोसे का नतीजा आज पूरी दुनिया के सामने है। सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली आयिशा थंसीम ने 500 में से 497 अंक हासिल कर चेन्नई शहर में टॉप किया है। इतना ही नहीं, वह तमिलनाडु के सरकारी स्कूलों में तीसरे स्थान पर रही हैं और पूरे शहर में निजी, सहायता प्राप्त और निगम स्कूलों के छात्रों के बीच भी टॉप तीन में शामिल हुई हैं।
आयिशा गवर्नमेंट मुस्लिम हायर सेकेंडरी स्कूल की छात्रा हैं। बचपन से ही उनका सपना डॉक्टर बनने का रहा है। बोर्ड परीक्षा में शानदार सफलता हासिल करने के बाद उन्होंने कहा कि वह अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता और शिक्षकों को देती हैं। उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि अब वह आगे जीवविज्ञान की पढ़ाई करना चाहती हैं और आने वाले वर्षों में नीट (NEET) परीक्षा की तैयारी कर डॉक्टर बनने का सपना पूरा करेंगी। आयिशा को भरोसा है कि वह 12वीं कक्षा में भी बेहतरीन अंक हासिल करेंगी।
जहां एक तरफ पूरे परिवार में खुशी का माहौल है, वहीं दूसरी तरफ उनके पिता के मन में आने वाले खर्चों की चिंता भी है। एम. काजा मोहिदीन एक दर्जी हैं और उनकी मासिक आय लगभग 20 से 25 हजार रुपये के बीच है। इस कमाई का लगभग आधा हिस्सा घर के किराए में ही चला जाता है। बावजूद इसके, उन्होंने अपनी बेटी के सपनों को कभी बोझ नहीं माना। उन्होंने कहा कि उन्हें पता है कि NEET की कोचिंग और आगे की पढ़ाई में काफी खर्च आएगा, लेकिन वह अभी से इसके लिए पैसे बचाना शुरू कर देंगे।
स्कूल प्रशासन का कहना है कि आयिशा शुरू से ही बेहद मेधावी छात्रा रही हैं। स्कूल की प्रधानाचार्य कनमणि प्रिया के अनुसार, अगर आयिशा अपने अंकों के पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करती हैं तो संभव है कि उनके अंक 500/500 हो जाएं और वह राज्य की टॉपर बन जाएं। उन्होंने बताया कि आयिशा नेशनल मीन्स-कम-मेरिट स्कॉलरशिप और तमिलनाडु मुख्यमंत्री टैलेंट सर्च परीक्षा की लाभार्थी भी हैं, जिसके तहत उन्हें छात्रवृत्ति मिलती है।
प्रधानाचार्य ने विश्वास जताया कि आयिशा आने वाले समय में अपने स्कूल, परिवार और पूरे राज्य का नाम और रोशन करेंगी।
यह कहानी सिर्फ एक छात्रा की सफलता की नहीं, बल्कि एक पिता के संघर्ष, त्याग और अटूट विश्वास की भी है। सिलाई मशीन पर दिन-रात मेहनत करने वाले उस पिता ने अपनी बेटी को यह एहसास कभी नहीं होने दिया कि गरीबी उसके सपनों के रास्ते में दीवार बन सकती है। आज आयिशा की यह सफलता उन लाखों परिवारों के लिए प्रेरणा बन गई है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने बच्चों के भविष्य के लिए हर कठिनाई का सामना करते हैं।