आतंकी हमले में इंसानियत की मिसाल बने आदिल, सरकार ने स्कूल का नाम कर दिया समर्पित

Story by  ओनिका माहेश्वरी | Published by  onikamaheshwari | Date 21-05-2026
Adil Becomes a Beacon of Humanity During Terror Attack; Government Dedicates School in His Honor
Adil Becomes a Beacon of Humanity During Terror Attack; Government Dedicates School in His Honor

 

ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली  
 
जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में जम्मू-कश्मीर सरकार ने एक भावुक और ऐतिहासिक फैसला लेते हुए हापतनार स्थित सरकारी हाई स्कूल का नाम बदलकर “शहीद आदिल हुसैन शाह मेमोरियल हाई स्कूल” कर दिया है। यह फैसला उस बहादुर युवक आदिल हुसैन शाह की याद में लिया गया है, जिसने पिछले वर्ष पहलगाम आतंकी हमले के दौरान पर्यटकों की जान बचाने की कोशिश करते हुए अपनी जान कुर्बान कर दी थी। सरकार के इस निर्णय को घाटी में इंसानियत, कश्मीरियत और मेहमाननवाजी के सम्मान के रूप में देखा जा रहा है।
 
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल बैसरन मैदान में आतंकवादियों ने पर्यटकों पर अचानक हमला कर दिया था। इस भयावह हमले में 25 पर्यटकों समेत आदिल हुसैन शाह की भी मौत हो गई थी। आदिल पेशे से पोनी चालक थे और पहलगाम आने वाले सैलानियों को ऊंचाई वाले इलाकों तक ले जाने का काम करते थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जैसे ही गोलीबारी शुरू हुई, आदिल ने बिना अपनी जान की परवाह किए पर्यटकों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की कोशिश की। उन्होंने कई लोगों को वहां से निकालने में मदद की, लेकिन इसी दौरान आतंकियों की गोलीबारी का शिकार होकर वे शहीद हो गए।
 
आदिल की बहादुरी और मानवता की भावना ने पूरे देश को भावुक कर दिया था। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक हर जगह उनकी सराहना हुई थी। लोगों ने उन्हें “कश्मीरियत का असली चेहरा” बताते हुए कहा था कि उन्होंने यह साबित कर दिया कि कश्मीर की पहचान केवल संघर्ष नहीं बल्कि इंसानियत, भाईचारा और मेहमाननवाजी भी है।
 
Hole in neck, bullets in chest, shoulders mutilated: How Syed Adil Hussain  Shah died saving tourist in Pahalgam terror attack | Srinagar News - Times  of India
 
स्कूल के नामकरण समारोह का आयोजन हापतनार में किया गया, जिसमें जम्मू-कश्मीर की शिक्षा मंत्री सकीना इटू मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। इस अवसर पर आदिल हुसैन शाह का परिवार, स्थानीय नागरिक, छात्र और प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। समारोह के दौरान माहौल बेहद भावुक हो गया जब आदिल के परिवार के सदस्यों ने उनकी यादों को साझा किया। शिक्षा मंत्री सकीना इटू ने कहा कि आदिल ने अपनी जान देकर यह संदेश दिया कि कश्मीर के लोग हमेशा मेहमानों की सुरक्षा और सम्मान को सर्वोच्च मानते हैं।
 
उन्होंने कहा कि अक्सर घाटी के लोगों को संदेह की नजर से देखा जाता है, लेकिन आदिल के बलिदान ने पूरी दुनिया को यह दिखा दिया कि यहां के लोग इंसानियत और भाईचारे में विश्वास रखते हैं। मंत्री ने कहा कि सरकार का यह कदम केवल एक औपचारिकता नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करने का प्रयास है ताकि छात्र आदिल के साहस और त्याग से सीख ले सकें। उन्होंने यह भी बताया कि हमले के बाद उमर अब्दुल्ला ने आदिल हुसैन शाह के परिवार से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की थी और उसी समय यह घोषणा की थी कि उनके सम्मान में किसी सरकारी संस्थान का नाम रखा जाएगा। अब सरकार ने उस वादे को पूरा करते हुए स्कूल का नाम आदिल के नाम पर कर दिया है।
 
स्थानीय लोगों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि आदिल ने अपने साहसिक कार्य से पूरे अनंतनाग जिले और कश्मीर घाटी का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि आदिल हमेशा दूसरों की मदद के लिए आगे रहते थे और उनका स्वभाव बेहद सरल तथा मिलनसार था। गांव के बुजुर्गों ने कहा कि उनका बलिदान आने वाले समय में युवाओं को समाज और देश के प्रति जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा देगा।
 
आदिल के परिवार ने भी सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके बेटे को जो सम्मान मिला है वह पूरे परिवार और गांव के लिए गर्व की बात है। अब “शहीद आदिल हुसैन शाह मेमोरियल हाई School” केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं बल्कि बहादुरी, मानवता, सेवा और बलिदान का प्रतीक माना जाएगा। स्थानीय प्रशासन का मानना है कि यहां पढ़ने वाले छात्र जब भी स्कूल का नाम सुनेंगे तो उन्हें उस युवक की याद आएगी जिसने दूसरों की जान बचाने के लिए अपनी जिंदगी न्योछावर कर दी थी।
 
 
 
 
इसी बीच आदिल हुसैन शाह के परिवार को एक और बड़ी सौगात मिली । दिवंगत आदिल—जो पहलगाम के पोनी चालक थे और बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले के दौरान पर्यटकों की रक्षा करते हुए शहीद हो गए थे—के परिवार के लिए नया घर बनाया गया। यह घर शिवसेना पार्टी के सदस्यों द्वारा महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में बनवाया गया। अनंतनाग के हापतनार गांव में बना यह एक मंजिला पक्का मकान परिवार की पुरानी मिट्टी और लकड़ी की झोपड़ी के ठीक बगल में तैयार किया गया, ताकि उस दुखद घटना के बाद परिवार की सहायता करने के वादे को पूरा किया जा सके।
 
इस नए घर का उद्घाटन अप्रैल 2026 में पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी के अवसर पर किया गया। स्थानीय लोगों ने इसे आदिल के बलिदान के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि बताया। उनका कहना है कि आदिल ने अपनी जान देकर इंसानियत और बहादुरी की ऐसी मिसाल कायम की है जिसे आने वाली पीढ़ियां हमेशा याद रखेंगी। यह पूरा घटनाक्रम एक बार फिर यह साबित करता है कि आतंक और हिंसा के बीच भी मानवता सबसे बड़ी ताकत होती है।