बंगाल के पाठ्यक्रम में शामिल होंगे श्यामा प्रसाद मुखर्जी: शुभेंदु

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 07-07-2026
Syama Prasad Mukherjee will be included in Bengal's curriculum: Shubhendu
Syama Prasad Mukherjee will be included in Bengal's curriculum: Shubhendu

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
 पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि राज्य के स्कूली पाठ्यपुस्तकों में भारतीय जनसंघ (बीजेएस) के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन और कार्य को शामिल किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि ‘‘जिन लोगों ने सिंगुर से टाटा मोटर्स की नैनो फैक्टरी को बाहर निकाला था, उनका जिक्र पाठ्यपुस्तक में नहीं होना चाहिए’’।
 
मुख्यमंत्री ने कहा कि वह इस बारे में राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री से ‘‘अपील करेंगे और अपनी इच्छा से उन्हें अवगत’’ कराएंगे।
 
उन्होंने सोमवार को कोलकाता के भवानीपुर स्थित ‘मित्रा इंस्टीट्यूशन’ में श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम से इतर कहा, ‘‘सिंगुर से टाटा को बाहर निकालने की कहानी को पाठ्यपुस्तक से हटाया जाना चाहिए।’’ मुखर्जी ‘मित्रा इंस्टीट्यूशन’ के पूर्व छात्र रहे हैं।
 
टाटा मोटर्स के नैनो कार संयंत्र के लिए कृषि जमीन के अधिग्रहण के विरोध में ममता बनर्जी के नेतृत्व में लंबे समय तक प्रदर्शन हुआ था जिसके कारण अक्टूबर 2008 में टाटा मोटर्स ने अपनी नैनो कार परियोजना को पश्चिम बंगाल के सिंगुर से गुजरात के साणंद स्थानांतरित कर दिया था।
 
उन्होंने कहा कि यह फैसला स्कूल शिक्षा विभाग की पाठ्यक्रम समिति को करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने सिर्फ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन और काम को शामिल करने का प्रस्ताव रखा है।
 
उन्होंने कहा, ‘‘पाठ्यक्रम का निर्णय कोई राजनीतिक नेता नहीं कर सकता, लेकिन इस विधानसभा क्षेत्र का विधायक होने के नाते मैं ऐसा प्रस्ताव रख सकता हूं।’’
 
मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले कैलेंडर वर्ष से पाठ्यपुस्तकों में पश्चिम बंगाल के निर्माण और भारत में उसके विलय में मुखर्जी के योगदान, देशभक्ति, अखंड भारत के बारे में उनके आदर्शों, संसद में उनके संबोधनों, केंद्र में उनके मंत्री पद और कलकत्ता विश्वविद्यालय में उनकी शिक्षा संबंधी विरासत को शामिल किया जाना चाहिए।
 
कार्यक्रम में राज्य के स्कूल और उच्च शिक्षा मंत्री भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘इन्हें स्कूल से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक प्रकाशित किया जाना चाहिए, पढ़ाया जाना चाहिए और इन पर चर्चा होनी चाहिए।’’
 
शुभेंदु ने बताया कि मुखर्जी 1906 से 1917 तक ‘मित्रा इंस्टीट्यूशन’ के छात्र रहे और 1924 से 1938 तक इसके शासी निकाय के सदस्य रहे।
 
उन्होंने कहा कि निर्वाचन क्षेत्र के पूर्व विधायक या सांसद ने वहां कोई विकास कार्य नहीं किया इसलिए वह मौजूदा वित्त वर्ष में ‘मित्रा इंस्टीट्यूशन’ के नवीनीकरण के लिए अपनी विधानसभा सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमएलए-एलएडी) निधि से 25 लाख रुपये देंगे।
 
सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पत्रकारों को बताया कि सुरंग परियोजना स्थल पर कोई मजदूर नहीं था और जिन लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है, वे इंजीनियर और सुरक्षा कर्मी हैं।
 
उन्होंने कहा, ‘‘अगर वहां काम चल रहा होता, तो यह और भी बड़ी त्रासदी होती।’’
 
भूस्खलन कल्लाडी में मीनाक्षी ब्रिज के पास हुआ, जहां मलप्पुरम और वायनाड जिलों को जोड़ने वाली सुरंग परियोजना का काम चल रहा है।
 
भूस्खलन के कारण वहां खड़ी एक निजी बस पास की नदी में बह गई और वहां आधी डूबी पड़ी रही। इसका इस्तेमाल मजदूरों को लाने-ले जाने के लिए किया जाता था।