आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
केंद्र सरकार द्वारा उपचारात्मक याचिका लंबित होने की बात कहे जाने के बाद उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि वह खनिज अधिकारों पर कर लगाने की विधायी शक्ति से संबंधित याचिकाओं पर 20 मई को विचार करेगा।
उच्चतम न्यायालय ने 25 जुलाई, 2024 के नौ-न्यायाधीशों की पीठ के उस फैसले पर पुनर्विचार का अनुरोध करने वाली याचिकाओं को सितंबर 2024 में खारिज कर दिया था, जिसमें यह कहा गया था कि खनिज अधिकारों पर कर लगाने की विधायी शक्ति राज्यों में निहित है।
नौ न्यायाधीशों की पीठ ने 8:1 के बहुमत से दिए गए फैसले में कहा था कि संसद के पास संविधान की सूची 1 की प्रविष्टि 54 के तहत खनिज अधिकारों पर कर लगाने की विधायी क्षमता नहीं है, जो केंद्र द्वारा खदानों और खनिज विकास के विनियमन से संबंधित है।
पुनर्विचार याचिकाएं खारिज होने के बाद, केंद्र ने शीर्ष अदालत में उपचारात्मक याचिका दायर की थी।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बुधवार को न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ से मामले को स्थगित करने का अनुरोध करते हुए कहा कि केंद्र द्वारा दायर की गई उपचारात्मक याचिका लंबित है।
इस मामले में पेश हुए कुछ वकीलों ने मेहता की दलील का समर्थन किया और कहा कि उपचारात्मक याचिका पर फैसला आने के बाद ही इन दलीलों पर सुनवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने पीठ से अनुरोध किया कि इन याचिकाओं को जुलाई में सूचीबद्ध किया जाए।
हालांकि, कुछ राज्य अधिकारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों ने इन दलीलों का विरोध किया और कहा कि पुनर्विचार याचिकाएं पहले ही खारिज की जा चुकी हैं। एक वकील ने कहा कि कुछ अपील 1999 और 2011 में दायर की गई थीं।