बंसमुद्र का बढ़ता तापमान समुद्री घास के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए खतरा : अध्ययन

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 06-05-2026
Rising ocean temperatures pose a threat to seagrass ecosystems: Study
Rising ocean temperatures pose a threat to seagrass ecosystems: Study

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
समुद्र के बढ़ते तापमान से समुद्री घास (सीग्रास) और उसके नीचे मौजूद सूक्ष्मजीवों के साथ उसके महत्वपूर्ण संबंधों पर खतरा पैदा हो सकता है, जिससे तटीय पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो सकते हैं। एक नए अध्ययन में यह दावा किया गया है।
 
ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स में लेक मैक्वेरी के पश्चिमी हिस्से में स्थित मायूना बे में पानी के भीतर समुद्री घास मीलों दूर तक फैली है। यहां सबसे सामान्य प्रजाति ‘जोस्टेरा म्यूलेरी’ है, जिसकी लंबी रिबन जैसी पत्तियां होती हैं और जो छोटी मछलियों, झींगा और केकड़ों के लिए आश्रय प्रदान करती है।
 
मायूना बे दिखने में सामान्य लग सकता है, लेकिन यह एक अनोखी प्राकृतिक प्रयोगशाला रहा है। पास स्थित एरारिंग पावर स्टेशन द्वारा दशकों तक झील में गर्म पानी छोड़े जाने के कारण यहां का तापमान आसपास के क्षेत्रों की तुलना में एक से तीन डिग्री सेल्सियस अधिक रहा है।
 
‘न्यू फाइटोलॉजिस्ट’ पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने यह जांच की कि भविष्य में जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र के तापमान में वृद्धि होने पर समुद्री घास और तलछट में रहने वाले सूक्ष्मजीवों के बीच संबंध कैसे प्रभावित होते हैं।
 
महत्वपूर्ण तटीय आवास
 
समुद्री घास को अक्सर नजरअंदाज किया जाता है, लेकिन यह पृथ्वी के सबसे महत्वपूर्ण तटीय आवासों में से एक है। यह तलछट को स्थिर करती है, पानी की सफाई कर पारदर्शिता बढ़ाती है और कई समुद्री जीवों के लिए भोजन व आश्रय प्रदान करती है। साथ ही, यह बड़ी मात्रा में कार्बन संग्रहित कर जलवायु परिवर्तन को धीमा करने में भी मदद करती है।