Supreme Court seeks reports from states on old age homes and facilities for senior citizens
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को सभी राज्यों को निर्देश दिया कि वे वृद्धाश्रमों की स्थापना और वरिष्ठ नागरिकों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की स्थिति के बारे में ताजा रिपोर्ट दाखिल करें।
न्यायालय 2016 में दायर उस जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा है जिसमें बुजुर्गों के कल्याण एवं संरक्षण के उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने का अनुरोध किया गया है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने डॉ. अश्विनी कुमार की जनहित याचिका पर सुनवाई की। याचिका में प्रत्येक जिले में वृद्धाश्रम स्थापित करने, वरिष्ठ नागरिकों को पर्याप्त पेंशन देने और उनके लिए वृद्धावस्था चिकित्सा देखभाल सुनिश्चित करने संबंधी निर्देशों को लागू करने का अनुरोध किया गया है।
सुनवाई के दौरान स्वयं अपना पक्ष रख रहे कुमार ने पीठ से मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि करोड़ों बुजुर्गों के अधिकारों एवं कल्याण से जुड़ा यह मामला वर्षों से लंबित है और न्यायालय द्वारा समय-समय पर निर्देश दिए जाने के बावजूद इस पर लंबे समय से सुनवाई नहीं हुई है।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि उच्चतम न्यायालय व्यापक सिद्धांत तय कर सकता है और उच्च न्यायालयों से उनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने को कहा जा सकता है।
न्यायालय 2016 में दायर उस जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा है जिसमें बुजुर्गों के कल्याण एवं संरक्षण के उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने का अनुरोध किया गया है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने डॉ. अश्विनी कुमार की जनहित याचिका पर सुनवाई की। याचिका में प्रत्येक जिले में वृद्धाश्रम स्थापित करने, वरिष्ठ नागरिकों को पर्याप्त पेंशन देने और उनके लिए वृद्धावस्था चिकित्सा देखभाल सुनिश्चित करने संबंधी निर्देशों को लागू करने का अनुरोध किया गया है।
सुनवाई के दौरान स्वयं अपना पक्ष रख रहे कुमार ने पीठ से मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि करोड़ों बुजुर्गों के अधिकारों एवं कल्याण से जुड़ा यह मामला वर्षों से लंबित है और न्यायालय द्वारा समय-समय पर निर्देश दिए जाने के बावजूद इस पर लंबे समय से सुनवाई नहीं हुई है।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि उच्चतम न्यायालय व्यापक सिद्धांत तय कर सकता है और उच्च न्यायालयों से उनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने को कहा जा सकता है।