Supreme Court issues notice to Union Minister of State Gopi on plea against High Court order
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
उच्चतम न्यायालय सोमवार को केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी की उस याचिका पर सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया, जिसमें उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में अपने निर्वाचन से जुड़े केरल उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती दी है।
उच्च न्यायालय ने त्रिशूर सीट से उनके निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका खारिज करने से इनकार कर दिया गया था।
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने त्रिशूर के रहने वाले एवं 'ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन' के नेता बिनॉय ए.एस. को नोटिस जारी किया है, जिन्होंने गोपी के निर्वाचन को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।
केरल से भाजपा के एकमात्र सांसद गोपी ने उच्च न्यायालय के एक अप्रैल के फ़ैसले को चुनौती दी है। उच्च न्यायालय ने कहा था कि बिनॉय की चुनाव याचिका विचार किये जाने योग्य है तथा पर्यटन और पेट्रोलियम राज्य मंत्री को मुकदमे का सामना करने के लिए कहा था।
त्रिशूर के सांसद ने चुनाव याचिका को यह कहते हुए चुनौती दी कि यह विचार किये जाने योग्य नहीं है। हालांकि, उच्च न्यायालय ने गोपी की याचिका को इस आधार पर खारिज कर दिया कि चुनाव याचिका में लगाए गए आरोपों पर सुनवाई की जरूरत थी।
बिनॉय ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि गोपी, उनके चुनाव एजेंट और उनके सहयोगियों ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 123 के तहत भ्रष्ट तरीके अपनाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि गोपी ने मतदाताओं को लुभाने के लिए धार्मिक प्रतीकों का गलत इस्तेमाल किया, वोट हासिल करने के लिए मोबाइल फोन जैसे तोहफे देने का वादा किया, और सोशल मीडिया पर पोस्ट किये गए वीडियो में उन्हें मतदाताओं को पैसे का लालच देते हुए दर्शाया गया।
अभिनेता से राजनीतिक नेता बने गोपी 2024 के लोकसभा चुनावों में केरल में सात दशक से अधिक समय से चले आ रहे भाजपा के राजनीतिक सूखे को खत्म करते हुए पार्टी के लिए ऐतिहासिक जीत हासिल की। उन्होंने त्रिशूर सीट पर 74,686 मतों के अंतर से जीत हासिल की।