Subhash Chandra opposes formation of five-member NCLT bench in personal insolvency case
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
एस्सेल समूह के चेयरमैन सुभाष चंद्रा ने उनके खिलाफ व्यक्तिगत दिवाला मामले की सुनवाई के लिए पांच सदस्यीय पीठ गठित किए जाने के राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के फैसले का बुधवार को विरोध किया। उन्होंने कहा कि न्यायाधिकरण को ऐसी पीठ गठित करने का अधिकार नहीं है।
राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के समक्ष चंद्रा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सस्मित पात्रा ने एनसीएलटी के आदेश को ‘‘त्रुटिपूर्ण और गलत’’ बताया और कहा कि उसे पांच सदस्यीय पीठ गठित करने का ‘‘अधिकार नहीं है।’’
पात्रा ने कहा कि पांच सदस्यीय पीठ ने मंगलवार को एनसीएलटी के सदस्य (न्यायिक) निलेश शर्मा के आदेश पर रोक लगा दी थी। शर्मा को एनसीएलटी की दो सदस्यीय पीठ के अलग-अलग फैसले के बाद तीसरे सदस्य के रूप में शामिल किया गया था।
एनसीएलटी ने मंगलवार को एस्सेल समूह के चेयरमैन चंद्रा को अपनी संपत्तियां हस्तांतरित करने से रोक दिया था और समूह की उधारी के लिए दी गई व्यक्तिगत गारंटी से जुड़े दावों के निपटारे की अनुमति देने वाले आदेश पर रोक लगा दी थी। इन दावों की राशि करीब 22,006 करोड़ रुपये है, जबकि चंद्रा ने करीब 6.5 करोड़ रुपये में इनके निपटारे की पेशकश की थी।