स्पेशल रिपोर्टः आजादी के समय भुखमरी के दौर से जूझता भारत कैसे बना अनाज के सरप्लस देश

Story by  मंजीत ठाकुर | Published by  [email protected] • 4 Months ago
इस साल होने वाला है रिकॉर्डतोड़ खाद्यान्न उत्पादन

मंजीत ठाकुर/ नई दिल्ली

एक दौर था कि देश में अनाज की इतनी कमी थी कि देश के प्रधानमंत्री को जनता से अपील करनी पड़ी थी कि हफ्ते में एक शाम को उपवास करें. तब लाल बहादुर शास्त्री देश के प्रधानमंत्री थे और देश को आजाद हुए महज डेढ़ दशक हुए थे.

लेकिन उनके प्रधानमंत्रित्व के समय से देश ने कृषि विकास की दिशा में ध्यान देना और बुनियादी ढांचा तैयार करना शुरू किया. सिंचाई के लिए नहरों के विकास के साथ-साथ देश में ट्यूब वेल क्रांति हुई. सिंचाई सुविधा, रासायनिक उर्वरक, कीटनाशकों, आधुनिक यंत्रों के विकास और गुणवत्ता पूर्ण और अधिक उपज देने वाले बीजों के इस्तेमाल से पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के कुछ जिलों में हरित क्रांति का आगाज हुआ.

हरित क्रांति की बदौलत देश में खाद्यान्न उपज में तीन गुना वृद्धि हुई है. पिछले छह दशक में देश में भारत की प्रति हेक्टेयर उपज बढ़कर 2.39 टन हो गया है. केंद्र सरकार ने इस संदर्भ में एक आंकड़ा जारी करते हुए कहा है कि खाद्यान्न का प्रति हेक्टेयर उत्पादन 1960 के दशक में 757 किग्रा था जो 2021 में प्रति हेक्टेयर 2.39 टन हो गया है.

केंद्र सरकार के मुताबिक प्रमुख कृषि फसलों के उत्पादन के चौथे अग्रिम अनुमान के अनुसार, 2021-22 के दौरान भारत में खाद्यान्न का उत्पादन रिकॉर्ड 315.72 मिलियन टन होने का अनुमान है. पिछले साल 2020-21 के दौरान कटाई की तुलना में उत्पादन 4.98 मिलियन टन अधिक होने की संभावना है.

सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, 2021-22 में पिछले पांच वर्षों (2016-17 से 2020-21) की औसत पैदावार की तुलना में 25 मिलियन टन अधिक उपज होने का अनुमान है. धान, मक्का, चना, दलहन, रेपसीड और सरसों, तिलहन और गन्ना का रिकॉर्ड उत्पादन की उम्मीद है.

कृषि मंत्रालय के अनुसार, चावल का कुल उत्पादन 130.29 मिलियन टन होने की संभावना है. अन्य अनाजों में गेहूं 106.84 मिलियन टन, मोटा अनाज 50.90 मिलियन टन, मक्का 33.62 मिलियन टन, दलहन 27.69 मिलियन टन, अरहर 4.34 मिलियन टन, चना 13.75 मिलियन टन, तिलहन 37.70 मिलियन टन, मूंगफली 10.11 मिलियन टन, सोयाबीन 12.99 मिलियन टन, रेपसीड और सरसों 11.75 मिलियन टन और गन्ना की उपज 431.81 मिलियन टन होने की उम्मीद है.

पांच वर्षों में औसत खाद्यान्न में उत्पादन के मुकाबले भी इस बार अधिक पैदावार होने की उम्मीद है. केंद्र सरकार के मुताबिक, 2021-22 के दौरान 13.85 मिलियन टन अधिक चावल की उपज का अनुमान है जबकि गेहूं की पैदावार पांच वर्षों के औसत से 2.96 मिलियन टन अधिक होने की संभावना है.

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के मुताबिक, भारत में, खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर होने के साथ ही दुनिया के बड़े हिस्से की खाद्य आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता भी है और देश भविष्य की जरूरतों और चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए रणनीतिक योजनाओं के साथ आगे बढ़ रहा है.

फिक्की के एक कार्यक्रम में तोमर ने कहा, “कोरोना महामारी के बावजूद, भारत के कृषि क्षेत्र ने 3.9 फीसद की विकास दर की महत्वपूर्ण उपलब्धि देखी है. साथ ही, हमारे कृषि निर्यात ने 4 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया, जिसे हमें बढ़ाते जाना है.”

असल में, 2050 तक विश्व की जनसंख्या 900 करोड़ से ज्यादा होने का अनुमान है और इसके साथ ही भोजन की मांग में तेजी से वृद्धि होगी.

लेकिन आजादी के 75 साल के बाद अब हम किसी भी अन्य देश की तुलना में अधिक फसलें उगाते हैं. विश्व में सर्वाधिक फसल सघनता भारत में है. चौथे अग्रिम अनुमान के अनुसार, भारत का वर्ष 2021-22 में 315.72 मीट्रिक टन खाद्यान्न उत्पादन है.

बेशक अनाज उत्पादन के क्षेत्र में हमने एक लंबी छलांग लगाई है. 1950-51 में देश में 50.82 मिलियन टन खाद्यान्न की पैदावार हुई थी जो 2014-15 में 252.02 मिलियन टन हो गई थी. लेकिन इस दिशा में विभिन्न योजनाओं की कामयाबी से यह 2021-22 में आगे बढ़कर 314.51 मिलियन टन हो गया है.