आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
घरेलू मांग में नरमी के कारण भारत के सेवा क्षेत्र की वृद्धि जून में घटकर 17 महीने के निचले स्तर पर आ गई। चुनौतीपूर्ण कारोबारी परिस्थितियों और कुछ सेवाओं के लिए ग्राहकों की घटती रुचि के कारण बिक्री एवं उत्पादन की रफ्तार धीमी पड़ी। शुक्रवार को जारी मासिक सर्वेक्षण में यह जानकारी मिली।
सर्वेक्षण के अनुसार, कई कंपनियों ने बताया कि बाजार की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों और उनकी सेवाओं में ग्राहकों की कम रुचि के कारण बिक्री प्रभावित हुई। इससे नई भर्तियां लगभग ठप रहीं और कारोबारी भरोसा भी कमजोर हुआ।
मौसमी रूप से समायोजित एचएसबीसी इंडिया सेवा क्रय प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) जून में घटकर 57.4 पर आ गया, जो मई में 59.8 था। यह पिछले 17 महीनों का सबसे कमजोर विस्तार है।
कारोबारी गतिविधियों के स्तर की पिछले महीने से तुलना के आधार पर तैयार किया जाने वाला यह सूचकांक 50 के तटस्थ स्तर और अपने दीर्घकालिक औसत, दोनों से ऊपर बना रहा।
क्रय प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) में 50 से ऊपर का स्तर गतिविधियों में विस्तार और 50 से नीचे का स्तर संकुचन को दर्शाता है।
सेवा क्षेत्र के उत्पादन में सुस्ती की मुख्य वजह नए ऑर्डर में ढाई साल से अधिक समय की सबसे धीमी वृद्धि रही।
एचएसबीसी की मुख्य भारत अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा, ‘‘ भारत का सेवा क्षेत्र पीएमआई जून में भी विस्तार के दायरे में रहा, लेकिन घटकर 57.4 पर आ गया जो 17 महीनों का सबसे निचला स्तर है। रफ्तार में यह कमी अधिक चुनौतीपूर्ण कारोबारी परिस्थितियों और विशेष रूप से घरेलू मांग में कमजोरी का संकेत देती है।’’
जून में निर्यात हालांकि मजबूत पक्ष में रहा।
कंपनियों ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, कनाडा, जर्मनी, मलेशिया, नेपाल, ओमान, कतर, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका से मांग बढ़ी, जिससे निर्यात में तीन महीनों की सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई।