नई दिल्ली।
रूस की सुरक्षा परिषद के सचिव सर्गेई शोइगु मंगलवार को 16वीं ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) बैठक में भाग लेने के लिए भारत पहुंचे। नई दिल्ली में आयोजित इस महत्वपूर्ण बहुपक्षीय बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं।
भारत में रूसी दूतावास ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर सर्गेई शोइगु के भारत आगमन की पुष्टि की। दूतावास ने अपने संदेश में कहा कि रूस की सुरक्षा परिषद के सचिव सर्गेई शोइगु ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक में भाग लेने के लिए भारत पहुंचे हैं।
भारत इस वर्ष 16वीं ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बैठक की मेजबानी कर रहा है। बैठक की अध्यक्षता भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल कर रहे हैं। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया कई पारंपरिक और गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रही है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, बैठक में ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुख "आज की दुनिया के सामने मौजूद गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों" विषय पर अपने विचार साझा करेंगे।
बैठक में तेजी से बदलते राष्ट्रीय सुरक्षा खतरों और उभरती प्रौद्योगिकियों से उत्पन्न नई चुनौतियों पर विशेष चर्चा होने की संभावना है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, डिजिटल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और आतंकवाद जैसे मुद्दे एजेंडे में प्रमुख रूप से शामिल हैं।
इसके अलावा, हाल ही में आयोजित ब्रिक्स संयुक्त आतंकवाद-रोधी कार्य समूह और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के सुरक्षित उपयोग से संबंधित कार्य समूहों की प्रगति की भी समीक्षा की जाएगी।भारत वर्ष 2026 में चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। इससे पहले भारत 2012, 2016 और 2021 में भी इस समूह की अध्यक्षता कर चुका है। इस बार भारत की अध्यक्षता का विषय "लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण" (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability) रखा गया है।
यह विषय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2025 में रियो शिखर सम्मेलन के दौरान प्रस्तुत 'मानवता पहले' और जन-केंद्रित दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करता है।वर्तमान में ब्रिक्स विश्व की 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, जिसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं।
ब्रिक्स को वैश्विक और क्षेत्रीय महत्व के राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर सहयोग और परामर्श के प्रभावी मंच के रूप में देखा जाता है। संगठन का दायरा अब केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें राजनीतिक एवं सुरक्षा सहयोग, आर्थिक एवं वित्तीय सहयोग तथा सांस्कृतिक एवं जन-जन संपर्क जैसे तीन प्रमुख स्तंभ शामिल हैं।
ब्रिक्स 2026 की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, सदस्य देश आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संरचना, दूरसंचार, कृषि, श्रम, रोजगार, वैश्विक व्यापार और विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) से जुड़े विषयों पर भी सहयोग को मजबूत कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की यह बैठक सदस्य देशों के बीच रणनीतिक समन्वय को और मजबूत करेगी तथा वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।