नई दिल्ली
भारत के वरिष्ठ पत्रकार और पद्म भूषण से सम्मानित HK Dua का बुधवार को नई दिल्ली में 88 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके परिवार के अनुसार वे पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे और करीब तीन सप्ताह पहले उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
परिवार ने बताया कि उनका अंतिम संस्कार 5 मार्च को दोपहर 12 बजे दिल्ली के Lodhi Road Crematorium में किया जाएगा। पत्रकारिता जगत में उनके निधन को एक बड़ी क्षति के रूप में देखा जा रहा है।
एचके दुआ देश के जाने-माने संपादकों में गिने जाते थे। उन्होंने अपने लंबे और प्रभावशाली करियर के दौरान कई प्रमुख राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। वे The Tribune के एडिटर-इन-चीफ रहे और वर्ष 2003 से 2009 तक इस प्रतिष्ठित अखबार का नेतृत्व किया। उनके कार्यकाल में ट्रिब्यून की राष्ट्रीय पहचान और संपादकीय विश्वसनीयता को नई मजबूती मिली।
पत्रकारिता के क्षेत्र में कई दशकों तक सक्रिय रहने वाले एचके दुआ ने The Indian Express, The Times of India और Hindustan Times जैसे प्रमुख अखबारों में भी वरिष्ठ संपादकीय पदों पर काम किया। उनकी लेखनी और संपादकीय दृष्टि ने भारतीय मीडिया जगत में एक अलग पहचान बनाई।
पत्रकारिता के अलावा उन्होंने सार्वजनिक जीवन में भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। वे पूर्व प्रधानमंत्री HD Deve Gowda और Atal Bihari Vajpayee के मीडिया सलाहकार भी रहे। इसके साथ ही उन्होंने भारत के राजदूत के रूप में डेनमार्क में भी देश का प्रतिनिधित्व किया।
साल 2009 में उन्हें राज्यसभा के लिए नामित किया गया था, जहां उन्होंने मीडिया की स्वतंत्रता और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रूप से भाग लिया। पत्रकारिता में उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 2008 में देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान Padma Bhushan से सम्मानित किया था।
उनके निधन पर राजनीतिक और मीडिया जगत की कई हस्तियों ने शोक व्यक्त किया है। कांग्रेस सांसद Manish Tewari ने सोशल मीडिया पर शोक जताते हुए उन्हें ऐसा संपादक बताया, जब संपादक होना सच में मायने रखता था।
मनीष तिवारी ने कहा कि एचके दुआ अपने सिद्धांतों पर अडिग रहने वाले पत्रकार थे। उन्होंने कभी संपादकीय स्वतंत्रता से समझौता नहीं किया और न ही राजनीतिक नेताओं या मीडिया मालिकों से किसी तरह की कृपा की उम्मीद की। तिवारी ने उन्हें बेहद सरल, स्पष्टवादी और ईमानदार व्यक्तित्व का इंसान बताया।एचके दुआ का निधन भारतीय पत्रकारिता के एक ऐसे दौर का अंत माना जा रहा है, जब संपादकीय मूल्यों और पत्रकारिता की स्वतंत्रता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती थी।





