शोपियां में दो आतंकियों की तलाश जारी

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 07-07-2026
Search continues for two terrorists in Shopian
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आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
जम्मू-कश्मीर के शोपियां ज़िले में प्रतिबंधित लश्कर-ए-तैयबा के दो स्थानीय आतंकवादियों की तलाश के लिए चलाया जा रहा अभियान मंगलवार को चौथे दिन में प्रवेश कर गया है। सुरक्षा बलों ने रात भर के ठहराव के बाद सुबह फिर से तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
 
तलाशी अभियान रातभर रोकने के बाद सुबह होते ही फिर शुरू कर दिया गया।
 
अधिकारियों के अनुसार, तीन जुलाई को इन दोनों आतंकियों को सात गांवों वाले मीमांदर इलाके के एक घने बाग में लगे निगरानी कैमरों में पहली बार देखा गया था।
 
सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की कई टुकड़ियों की संयुक्त टीम ने इलाके की घेराबंदी कड़ी कर रखी है। सुरक्षा बलों ने सोमवार शाम तक चार गांवों की तलाशी पूरी कर ली थी।
 
अधिकारियों ने बताया कि घेराबंदी में फंसे आतंकियों की पहचान लतीफ और जाकिर के रूप में हुई है। उन्होंने कथित तौर पर सेना के जवानों के करीब पहुंचने पर गोलीबारी शुरू कर दी। इसके बाद दोनों ओर से गोलीबारी हुई।
 
सेना की विशेष आतंकवाद रोधी इकाई 'विक्टर फोर्स' ने घने बाग के रास्तों से आतंकियों के भागने की सभी संभावित कोशिशों को रोकने के लिए अतिरिक्त जवानों की तैनाती की है। इसके अलावा इलाके में रोशनी की भी व्यवस्था की गई है।
 
अधिकारियों ने बताया कि गर्मी के महीनों में घने पेड़-पौधों और पत्तियों के कारण आतंकवादियों को प्राकृतिक आड़ मिल जाती है, जिससे निगरानी करना मुश्किल हो जाता है। इसका फायदा उठाकर घिरे हुए आतंकी सुरक्षा घेरा तोड़ने के लिए उन जगहों का इस्तेमाल कर सकते हैं, जहां निगरानी कम होती है।
 
सुरक्षा रिकॉर्ड के अनुसार, दोनों आतंकी दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले के रहने वाले हैं। बताया जा रहा है कि जाकिर वर्ष 2024 से लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा हुआ है जबकि लतीफ पिछले साल इस संगठन में शामिल हुआ था।
 
शोपियां ऐतिहासिक रूप से दक्षिण कश्मीर को मध्य कश्मीर और पीर पंजाल पर्वत श्रृंखला से जोड़ने वाले एक महत्वपूर्ण मार्ग के रूप में जाना जाता रहा है।
 
अधिकारियों ने बताया कि जहां हमलों के लिए विदेशी आतंकियों का इस्तेमाल बढ़ा है, वहीं लतीफ और जाकिर जैसे स्थानीय आतंकियों पर लगाम लगाना भी बेहद जरूरी है। इससे आतंकी संगठनों के मददगार नेटवर्क को तोड़ने और स्थानीय युवाओं की भर्ती के सिलसिले को रोकने में मदद मिल सकती है।