नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को यूट्यूबर गुलशन पाहुजा को आपराधिक अवमानना और न्यायपालिका की छवि खराब करने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा सुनाई गई छह महीने की साधारण कैद की सज़ा पर रोक लगा दी। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने पाहुजा की अपील पर नोटिस जारी किया और उन्हें तुरंत हिरासत से रिहा करने का आदेश दिया।
दिल्ली हाई कोर्ट ने पाहुजा को अवमानना के हर मामले में अधिकतम छह महीने की कैद और 2,000 रुपये जुर्माने की सज़ा सुनाई थी, और ये सज़ाएं एक साथ चलनी थीं। हाई कोर्ट ने पाया कि पाहुजा ने कोई "पछतावा" नहीं दिखाया और सज़ा सुनाने की सुनवाई के दौरान भी न्यायिक प्रणाली के खिलाफ "अपमानजनक" टिप्पणियां कीं। हाई कोर्ट ने गौर किया कि यूट्यूबर ने कहा था कि उन्हें भारतीय अदालतों से न्याय की कोई उम्मीद नहीं है और न्यायिक मनमानी की तुलना "तानाशाही" से की थी।
हाई कोर्ट ने 20 मई को दर्ज किया था कि पाहुजा ने न्यायिक प्रणाली के खिलाफ टिप्पणी करते हुए कहा था कि "अदालतों की मनमानी बढ़ती जा रही है" और यह भी कहा कि "मनमानी का दूसरा अर्थ तानाशाही होता है"। कोर्ट ने पाया कि अवमानना करने वाले व्यक्ति ने न तो पछतावा जताया और न ही अपने व्यवहार में सुधार करने की कोई इच्छा दिखाई। हाई कोर्ट ने कहा कि पछतावा दिखाने के बजाय, उन्होंने सुनवाई के दौरान और अपमानजनक बातें कहकर अवमानना को और बढ़ा दिया। कोर्ट ने यह भी माना कि ऐसी स्थितियों में नरमी बरतने से भविष्य में उन्हें ऐसी हरकतें दोहराने का बढ़ावा मिल सकता है। चूंकि पाहुजा ने सुप्रीम कोर्ट जाने की इच्छा जताई थी, इसलिए हाई कोर्ट ने उन्हें शीर्ष अदालत में जाने का मौका देने के लिए सज़ा को 60 दिनों के लिए स्थगित कर दिया था। शीर्ष अदालत में यूट्यूबर की ओर से वकील मनीष जैन, विकास कुमार वर्मा और आदित्य कौशिक पेश हुए।