NDPS PIL: SC ने केंद्र-राज्यों को नोटिस

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 10-08-2026
SC notice to Centre, States on PIL seeking time-bound NDPS probes, special courts, confiscation of drug mafia assets
SC notice to Centre, States on PIL seeking time-bound NDPS probes, special courts, confiscation of drug mafia assets

 

नई दिल्ली 
 
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र और राज्य सरकारों को एक PIL (जनहित याचिका) पर नोटिस जारी किया। इस याचिका में देश भर में ड्रग्स की बढ़ती समस्या से निपटने और संगठित ड्रग तस्करी नेटवर्क को खत्म करने के लिए बड़े सुधारों की मांग की गई है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की बेंच - जिसमें जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे - ने कहा कि यह "बहुत गंभीर मामला" है। बेंच ने कहा कि यह समस्या पूरे देश में फैली हुई है और एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल की ज़रूरत है।
 
जस्टिस बागची ने नशीले पदार्थों की सीमा-पार तस्करी, खासकर एशिया के 'गोल्डन क्रिसेंट' इलाके से होने वाली तस्करी पर ज़ोर दिया। जस्टिस बागची ने कहा, "ये सभी बातें बहुत अहम हैं। भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमा को देखते हुए, आप 'गोल्डन क्रिसेंट', बर्मा और अफ़गानिस्तान की स्थिति पर गौर कर सकते हैं।" वकील अश्विनी उपाध्याय की ओर से दायर याचिका में ड्रग तस्करी के खिलाफ लड़ाई को मज़बूत करने के लिए कई निर्देश देने की मांग की गई थी। इनमें नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों की तय समय-सीमा में जांच और सुनवाई, तस्करों की संपत्ति ज़ब्त करना और पूरे देश में जांच के लिए एक समान प्रोटोकॉल बनाना शामिल है।
 
याचिका में केंद्र, राज्यों और विधि आयोग (Law Commission) से नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट के तहत जांच, अभियोजन और पुनर्वास व्यवस्था को मज़बूत करने के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया गया कि वह केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश दे कि वे सभी NDPS मामलों में फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) रिपोर्ट जमा करने के लिए अनिवार्य समय-सीमा तय करें और तलाशी, ज़ब्ती और सैंपलिंग के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) बनाएं।
 
इसमें NDPS एक्ट की धारा 36 और 36A के तहत स्पेशल कोर्ट बनाने की भी मांग की गई, ताकि तय समय में जांच और तेज़ी से सुनवाई सुनिश्चित हो सके। याचिका की मुख्य मांगों में शामिल थे: नए साइकोएक्टिव पदार्थों (NPS) की पहचान और उन्हें समय पर अधिसूचित करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाना; तलाशी, ज़ब्ती और सैंपलिंग की कार्यवाही की अनिवार्य डिजिटल रिकॉर्डिंग और वीडियोग्राफी लागू करना; और नशे के आदी लोगों के इलाज के लिए NDPS एक्ट की धारा 39 और 64A के तहत पुनर्वास और वेलनेस सेंटर बनाना।
 
याचिकाकर्ता ने सज़ा देने की एक ऐसी श्रेणीबद्ध नीति की भी मांग की जिसमें तस्करों, फाइनेंसरों और संगठित ड्रग सिंडिकेट के लिए कड़ी सज़ा का प्रावधान हो, जबकि नशे के आदी लोगों और निजी इस्तेमाल के लिए अपराध करने वालों के साथ अलग तरह से व्यवहार किया जाए। इसमें NDPS एक्ट, प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), बेनामी प्रॉपर्टी एक्ट, प्रिवेंशन ऑफ़ करप्शन एक्ट और ब्लैक मनी एक्ट के तहत ड्रग्स की तस्करी करने वालों, उन्हें फ़ंड देने वालों और उनके परिवार के सदस्यों की संपत्ति का तय समय में आकलन और ज़ब्ती करने की भी मांग की गई। इसके अलावा, PIL में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया कि वह लॉ कमीशन को इस मुद्दे पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दे और यह घोषित करे कि NDPS मामलों में सज़ा एक साथ (concurrently) चलने के बजाय एक के बाद एक (consecutively) चलनी चाहिए।
 
याचिका के अनुसार, ड्रग्स की तस्करी के देशव्यापी परिणाम होते हैं; यह सार्वजनिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है, परिवारों को बर्बाद करती है, संगठित अपराध और टेरर फ़ंडिंग को बढ़ावा देती है, और नशे की लत से होने वाली मौतों का कारण बनती है।
इसमें दावा किया गया है कि जांच का कोई एक जैसा प्रोटोकॉल नहीं है, फ़ोरेंसिक जांच के लिए कोई कानूनी समय-सीमा नहीं है, ड्रग्स की तस्करी से हुई कमाई का पता लगाने और उसे ज़ब्त करने का कोई प्रभावी तरीका नहीं है, और NDPS एक्ट में प्रावधान होने के बावजूद पुनर्वास उपायों को ठीक से लागू नहीं किया जा रहा है।
 
PIL में पंजाब में एक महिला के पांच बेटों की नशे की लत से मौत, कई राज्यों में ड्रग्स से जुड़े कथित अपराधों और 2025 में ड्रग्स के मामलों और ज़ब्ती में तेज़ी से हुई बढ़ोतरी को दिखाने वाले सरकारी आंकड़ों जैसी घटनाओं का ज़िक्र किया गया। इसमें आगे कहा गया है कि ये घटनाएँ NDPS एक्ट को प्रभावी ढंग से लागू करने और अनुच्छेद 14, 21 और 47 के तहत राज्य के संवैधानिक दायित्वों को पूरा करने के लिए मज़बूत संस्थागत तंत्र की ज़रूरत को दिखाती हैं।
 
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि जांच के एक जैसे मानकों का अभाव, फ़ोरेंसिक रिपोर्ट में देरी, स्पेशल कोर्ट की कमी और पुनर्वास के लिए अपर्याप्त बुनियादी ढांचे ने NDPS एक्ट के कार्यान्वयन को कमज़ोर कर दिया है और तेज़ी से जांच और सुनवाई के संवैधानिक अधिकार को कमज़ोर किया है। यह याचिका नारकोटिक्स अपराधों की जांच, अभियोजन, सज़ा, पुनर्वास और निगरानी के लिए एक समन्वित राष्ट्रीय ढांचा लाने के लिए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग करती है।