RCOM मनी लॉन्ड्रिंग केस: पुनीत गर्ग की जमानत पर ED से जवाब तलब

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 07-07-2026
Rs 40000 crores Money laundering case: Delhi HC seeks response from ED on bail plea of former RCOM director Punit Garg
Rs 40000 crores Money laundering case: Delhi HC seeks response from ED on bail plea of former RCOM director Punit Garg

 

नई दिल्ली  

दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM) के पूर्व डायरेक्टर पुनीत नरेंद्र गर्ग की जमानत याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जवाब मांगा है। गर्ग पर कथित तौर पर 40,000 करोड़ रुपये से अधिक के बैंक फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोप लगाए गए हैं।

जस्टिस प्रतीक जालान की पीठ ने गर्ग और ED के वकीलों की शुरुआती दलीलें सुनने के बाद जांच एजेंसी को नोटिस जारी किया। ED की ओर से विशेष अधिवक्ता जोहेब हुसैन और प्रांजल त्रिपाठी पेश हुए।

इससे पहले राउज एवेन्यू कोर्ट ने ED की ओर से दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए 15 जून को गर्ग की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। ED ने गर्ग को 29 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया था।

ED का आरोप

ED ने आरोप लगाया है कि RCOM और उसकी समूह कंपनियों से जुड़े कथित बैंक फ्रॉड से जुड़े अपराध की आय (proceeds of crime) को कई विदेशी सहायक कंपनियों और ऑफशोर संस्थाओं के जरिए डायवर्ट किया गया।

जांच एजेंसी के अनुसार, इस रकम का एक हिस्सा अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित मैनहट्टन में एक लग्जरी कोंडोमिनियम खरीदने में इस्तेमाल किया गया। ED का आरोप है कि RCOM की कॉरपोरेट इंसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) के दौरान इस संपत्ति को कथित रूप से बेचा गया और बिक्री से मिले 8.3 मिलियन अमेरिकी डॉलर को एक संदिग्ध निवेश व्यवस्था के जरिए भारत भेजा गया।

ED ने यह भी आरोप लगाया कि कथित अपराध से जुड़ी रकम का कुछ हिस्सा पुनीत गर्ग के निजी खर्चों, जिसमें उनके बच्चों की विदेश शिक्षा से जुड़े भुगतान भी शामिल हैं, में इस्तेमाल किया गया।

गर्ग की दलील

गर्ग ने अपनी जमानत याचिका में कहा है कि वह 61 वर्ष के हैं और कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। उनके वकील ने अदालत को बताया कि उन्हें क्रोहन कोलाइटिस, रीढ़ की हड्डी से जुड़ी गंभीर समस्या, ऑस्टियोपोरोसिस, हाई ब्लड प्रेशर, प्रोस्टेट संबंधी समस्या, गठिया और मानसिक तनाव जैसी परेशानियां हैं।

गर्ग ने निजी अस्पताल में जांच और इलाज के लिए अंतरिम जमानत की मांग भी की थी, लेकिन अप्रैल में उनकी यह याचिका खारिज कर दी गई थी। अदालत ने AIIMS मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर कहा था कि फिलहाल उन्हें निजी अस्पताल में जांच की आवश्यकता नहीं है।

मामले की पृष्ठभूमि

ED ने यह कार्रवाई CBI की 21 अगस्त 2025 को दर्ज FIR के आधार पर शुरू की थी। FIR में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए थे।

ED के अनुसार, पुनीत गर्ग ने 2006 से 2013 तक RCOM में ग्लोबल एंटरप्राइज बिजनेस के अध्यक्ष, 2014 से 2017 तक रेगुलेटरी अफेयर्स के अध्यक्ष और अक्टूबर 2017 से एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के रूप में काम किया। अप्रैल 2019 से अप्रैल 2025 तक वे कंपनी के नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर रहे।

ED का आरोप है कि गर्ग ने कंपनी में वरिष्ठ पदों पर रहते हुए कथित तौर पर अपराध से प्राप्त धन को हासिल करने, छिपाने, परतों में बांटने और इस्तेमाल करने में भूमिका निभाई। मामले की जांच जारी है।