आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने करनाल के एक बाल देखभाल संस्थान में दो बच्चों से कथित तौर पर मारपीट के मामले में प्रदेश के पुलिस महानिदेशक, महिला एवं बाल विकास विभाग और अन्य संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है।
हरियाणा मानवाधिकार आयोग (एचएचआरसी) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा ने अपने दो जुलाई के आदेश में कहा कि यह मामला न केवल दो बच्चों के खिलाफ हिंसा से जुड़ा है, बल्कि राज्य सरकार द्वारा संचालित बाल देखभाल संस्थान (सीसीआई) में सुरक्षा और संरक्षण व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
यह आदेश आयोग को इस मामले में मिली शिकायत के आधार पर जारी किया गया।
शिकायत के अनुसार, किशोर न्याय बोर्ड के आदेशों के तहत दो बालक करनाल के मधुबन स्थित प्लेस ऑफ सेफ्टी (बाल सुधार केंद्र) में रह रहे थे।
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि यहां के दो कर्मचारियों गुरलाल और प्रदीप ने बच्चों को पाइप और बेल्ट से बुरी तरह पीटा, जिससे उनके शरीर पर कई चोटें आईं।
शिकायत में कहा गया कि घटना के बाद दोनों बच्चों को चिकित्सीय जांच के लिए कुंजपुरा के सरकारी अस्पताल ले जाया गया और उनके मेडिको-लीगल रिपोर्ट (एमएलआर) में कई चोटें सामने आई हैं।
यह भी आरोप लगाया गया है कि मधुबन थाने में मामला दर्ज कराने के बावजूद अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।
एचएचआरसी ने पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया कि वे शिकायत की स्थिति, प्राथमिकी दर्ज हुई है या नहीं, जांच की वर्तमान स्थिति तथा मेडिको-लीगल रिपोर्ट, इलाज के रिकॉर्ड और पीड़ितों के बयानों की प्रतियां सहित एक रिपोर्ट सौंपें।
अधिकारियों ने बताया कि मुआवज़ा श्रम विभाग की उपकर निधि से दिया गया।
अधिकारी ने कहा कि सरकार उन हालात की भी जांच करेगी जिनकी वजह से यह हादसा हुआ और घटना के लिए ज़िम्मेदार लोगों की पहचान करेगी।