आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
केरल के एक मंत्री ने वायनाड में हुए भूस्खलन को 'मानव निर्मित' आपदा करार दिया है, जिसमें कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई जबकि सात लोग घायल हो गए और सात अन्य लापता हैं।
अधिकारियों ने बताया कि यह भूस्खलन कल्लाडी में मीनाक्षी पुल के पास पूर्वाह्न 11 बजे हुआ, जहां कोझिकोड और वायनाड जिलों को जोड़ने वाली सुरंग सड़क परियोजना का काम चल रहा था। यह दुर्घटना स्थल मेप्पाडी पंचायत के अंतर्गत आता है, जिसने 2024 में भी भीषण भूस्खलन की त्रासदी देखी थी।
घटना से जुड़े एक वीडियो में मीनाक्षी पुल के पास जमा मिट्टी का बड़ा ढेर बारिश के कारण अचानक नीचे खिसकता हुआ दिखाई दिया।
केरल के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने यहां पत्रकारों से कहा कि लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के मंत्री पी. के. बशीर और जिलाधिकारी ने ठेकेदारों को इस क्षेत्र में बड़ी मात्रा में जमा मिट्टी के मलबे को हटाने के निर्देश काफी पहले ही दे दिए थे।
केरल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (केएसडीएमए) के कार्यालय में अधिकारियों के साथ स्थिति की समीक्षा करने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा, "हालांकि, ठेकेदारों ने इन निर्देशों का पालन नहीं किया।"
उन्होंने कहा, "यह एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। बचाव प्रयास जारी हैं।"
मुख्यमंत्री ने पत्रकारों के सवालों के जवाब में कहा कि मौसम संबंधी उचित चेतावनी जारी नहीं होना भूस्खलन का कारण नहीं था, बल्कि अधिकारियों के निर्देशों के अनुसार समय पर मिट्टी नहीं हटाए जाने की वजह से यह घटना हुई।
कृषि मंत्री टी सिद्दीकी ने पत्रकारों से कहा, "यह प्राकृतिक भूस्खलन नहीं है। यह एक मानव निर्मित भूस्खलन है, जो खुदाई के बाद निकाली गई मिट्टी को अवैज्ञानिक तरीके से इकट्ठा करने के कारण हुई है।"
मंत्री ने कहा कि इस संबंध में पहले भी चिंताएं जताई गई थीं। उन्होंने बताया कि स्थिति का आकलन करने, जमा की गई मिट्टी को हटाने और जरूरत पड़ने पर काम रोकने के निर्देश जारी किए गए थे।
इस बीच, भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने मंगलवार को जिले में भारी बारिश का 'रेड अलर्ट' जारी किया है, जहां दिन के समय मानंतवाडी और वायथिरी क्षेत्रों में अत्यधिक भारी बारिश हुई।