आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
प्रख्यात इतिहासकार जयसिंगराव पवार का बृहस्पतिवार को पश्चिमी महाराष्ट्र के कोल्हापुर में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वे 85 वर्ष के थे।
परिवारिक सूत्रों के अनुसार, पवार एक महीने से फेफड़ों से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे थे।
उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज और राजर्षि शाहू महाराज के इतिहास को जनमानस तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके निधन को ऐतिहासिक शोध के क्षेत्र के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
पवार ने तीन दशकों से अधिक समय तक कॉलेज में प्रोफेसर के रूप में सेवाएं दीं और छात्रों के लिए 20 पाठ्यपुस्तक लिखीं। उन्होंने कोल्हापुर स्थित शिवाजी विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में ऐतिहासिक दस्तावेजों पर शोध करने का व्यापक अनुभव प्राप्त किया।
उनकी प्रसिद्ध पुस्तकों में 'महारानी ताराबाई', 'सेनापति संताजी घोरपड़े', 'मराठेशाहीचा मागोवा' और 'राजर्षि शाहू स्मारक ग्रंथ' शामिल हैं।
वे अखिल महाराष्ट्र इतिहास परिषद (ऑल महाराष्ट्र हिस्ट्री कॉन्फ्रेंस) के संस्थापक सदस्य थे और उन्होंने तीन वर्षों तक इसके अध्यक्ष के रूप में कार्य किया।
वर्ष 1992 में उन्होंने महाराष्ट्र इतिहास प्रबोधिनी (महाराष्ट्र इतिहास अकादमी) की स्थापना की। वे "सामाजिक ज्ञान के साथ ऐतिहासिक अनुसंधान" की अवधारणा में दृढ़ विश्वास रखते थे और शिवाजी विश्वविद्यालय में राजर्षि शाहू अनुसंधान केंद्र के निदेशक थे।