आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
केरल में शुक्रवार को मलयालम माह ‘कर्किडकम’ के साथ ही ‘रामायण मासम’ की शुरुआत हो गयी। इस अवसर पर राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर और मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन समेत कई नेताओं ने लोगों को शुभकामनाएं दीं।
भक्ति और आध्यात्मिक चिंतन के महीने के रूप में मनाए जाने वाले रामायण मासम के दौरान राज्यभर में घरों और मंदिरों में प्रतिदिन ‘अध्यात्म रामायण’ का पाठ किया जाता है। यह महीना पारंपरिक रूप से आयुर्वेदिक कायाकल्प उपचारों के लिए भी जाना जाता है।
राज्यपाल आर्लेकर ने कहा कि रामायण मासम का पालन केरल की एक प्रिय आध्यात्मिक परंपरा है, जिसने पीढ़ियों से राज्य की सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध किया है।
उन्होंने कहा, ‘‘पवित्र महीने में अध्यात्म रामायण के पाठ की परंपरा हमारी गहरी आध्यात्मिक धरोहर है। रामायण केवल एक महाकाव्य नहीं, बल्कि सत्य, कर्तव्य, करुणा, विनम्रता और न्याय के प्रति अटूट प्रतिबद्धता जैसे आदर्शों के माध्यम से लोगों को प्रेरित करने वाला धर्मपूर्ण जीवन का कालजयी मार्गदर्शक है।’’
राज्यपाल ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन लोगों को यह संदेश देता है कि नैतिक साहस और निस्वार्थ सेवा ही एक मजबूत और एकजुट समाज की वास्तविक नींव हैं।