राज्यसभा : मोदी ने 59 सांसदों को विदाई दी, कहा कि राजनीति में ‘‘फुल स्टॉप’’ नहीं होता

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 18-03-2026
Rajya Sabha: Modi bids farewell to 59 MPs, says there are no
Rajya Sabha: Modi bids farewell to 59 MPs, says there are no "full stops" in politics

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अप्रैल से जुलाई के बीच राज्यसभा से सेवानिवृत्त हो रहे 59 सांसदों को विदायी देते हुए बुधवार को संसद को ‘‘एक खुला विश्वविद्यालय’’ करार दिया।
 
प्रधानमंत्री ने सेवानिवृत्त हो रहे सांसदों से राष्ट्रीय जीवन में योगदान जारी रखने का आह्वान करते हुए कहा ‘‘राजनीति में ‘फुल स्टॉप’ नहीं होता।’’
 
उच्च सदन में मोदी ने कहा कि ऐसे क्षण स्वाभाविक रूप से पार्टीगत मतभेदों को भुला देते हैं। उन्होंने कहा ‘‘हम सभी में एक साझा भावना उत्पन्न होती है – यह एहसास कि हमारे सहयोगी अब अन्य प्रयासों को आगे बढ़ाने जा रहे हैं।’’
 
उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद कुछ सदस्य पुन: सदन में आएंगे और कुछ नहीं आएंगे। ऐसे सदस्यों को प्रधानमंत्री ने आश्वस्त करते हुए कहा ‘‘राजनीति में ‘फुल स्टॉप’ जैसी कोई चीज़ नहीं होती। भविष्य आपका भी इंतजार कर रहा है, और आपका अनुभव हमेशा हमारे राष्ट्रीय जीवन का स्थायी हिस्सा रहेगा।’’
 
मोदी ने तीन वरिष्ठ नेताओं – पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा, नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शप) प्रमुख शरद पवार की खास तौर पर सराहना की और उन्हें ऐसे स्तंभ बताया जिन्होंने अपने जीवन का आधे से अधिक समय संसदीय कार्यवाीर में बिताया।
 
उन्होंने कहा ‘‘जिस तरह वे नियमित रूप से सदन आते हैं, कार्रवाई में इतनी निष्ठा के साथ भाग लेते हैं, वह वास्तव में अनुकरणीय है – यह एक ऐसी भावना है जिससे सभी नए सांसदों को सीख लेनी चाहिए।’’
 
प्रधानमंत्री ने सेवानिवृत्त हो रहे उपसभापति हरिवंश की भी सराहना की। मोदी ने उन्हें ‘‘मृदुभाषी और विनम्र’’ लेकिन ‘‘कठोर कार्रवाई करने वाला व्यक्ति’’ बताया। उन्होंने उल्लेख किया कि हरिवंश ने अवकाश के दौरान देशभर की यात्राएं कीं और युवाओं से राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर संवाद किया।
 
उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा ‘‘हमारे आठवले जी वास्तव में सदाबहार हैं। वह जा रहे हैं, फिर भी मुझे विश्वास है कि कोई खालीपन महसूस नहीं करेगा, वह लगातार सेवाएं देते रहेंगे।’’
 
प्रधानमंत्री ने दो सदनों वाली संसदीय संरचना में विधेयक पारित करने की प्रक्रिया की तुलना ‘‘दूसरी राय लेने’’ (सेकेंड ओपीनियन) से की और कहा कि यह लोकतांत्रिक निर्णय को मजबूत बनाता है। उन्होंने रोजमर्रा के उदाहरण देते हुए कहा, ‘‘जब जीवन में महत्वपूर्ण निर्णय लेना होता है, तब परिवार के सदस्य मिलकर सहमति बनाते हैं; तब भी वे सुझाव देते हैं- 'क्यों न आप उससे राय लें? वरिष्ठ सदस्य से दूसरी राय लें।’’